बहजोई(संभल)। हनुमान जी का मन निर्मल है। हनुमान जी ने इंद्रियों को जीत लिया है। हनुमान जी राम नाम की कथा बड़े ही चाव से सुनते हैं। यह बात हीरादेवी तोताराम कन्या इंटर कॉलेज परिसर में श्रीराम कथा सेवा समिति की ओर से चल रही श्रीराम कथा के बखान के छठे दिन जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कही।
शुक्रवार को कथा का बखान करते हुए तुलसी पीठाधीश्वर ने कहा कि सूर्यदेव की आज्ञा लेकर वीर हनुमान किष्किंधा पर्वत पर पहुंच जाते हैं और वहां किष्किंधा के राजा सुग्रीव के मंत्री बन जाते हैं। वह इसलिए, कि शिक्षा प्रदान करने के बाद सूर्यदेव ने हनुमान जी से दक्षिणा में मांगा था कि हनुमान जी उनके पुत्र सुग्रीव को भगवान श्रीराम से मिलाएंगे। इसी दक्षिणा के कारण वीर हनुमान सुग्रीव को श्रीराम से मिलाने किष्किंधा पर्वत पर आकर रहने लगे।
श्रीराम व लक्ष्मण को तपस्वी के रूप में किष्किंधा की ओर से आते देख सुग्रीव कहते हैं कि हे हनुमान, ब्राह्मण का वेश धरकर जाओ और देखो कि यह दो तपस्वी युवक किष्किंधा की ओर क्यों आ रहे हैं और यहां आने का उनका क्या अभिप्राय है। इस पर हनुमान जी ब्राह्मण वेश धारण कर राम व लक्ष्मण के पास जाते हैं और अपना ब्राह्मण वेशधारी परिचय बताते हुए राम व लक्ष्मण से परिचय पूछते हैं। इसके बाद श्रीराम ने अपना परिचय चरित गाकर दिया। इससे हनुमान जी पहचान गए और प्रभु राम के चरणों में गिर गए।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सुनाया कि हनुमान जी ब्राह्मण रूप छोड़कर वानर रूप में आ गए। श्रीराम ने कहा कि हम तो पिता का वचन मानकर वन को आए हैं। हनुमान जी ने कहा कि किष्किंधा पर्वत पर मेरे राजा सुग्रीव रहते हैं। मैं उनका मंत्री हूं और वह आपके दास हैं। उनसे मित्रता कर लीजिए। वह अपने वानरों को भेजकर सीता माता की खोज कराएंगे। इस बीच जगद्गुरु ने श्रोताओं को धर्मरथ की जानकारी दी।
जगद्गुरु सुनाते हैं कि लक्ष्मण शक्ति के समय हनुमान जी संजीवनी के लिए पूरा पर्वत लेकर आ रहे हैं। वहीं, भरत ने हनुमान जी के माथे पर वाण से प्रहार किया। इससे हनुमान जी नीचे गिरते आ रहे हैं। वहीं, भारी पर्वत से प्रजा न दब जाए, तो हनुमान ने आह्वान करते हुए पर्वत अपने पिता पवन देव को दे दिया। हनुमान जी का मन निर्मल है। हनुमान जी ने इंद्रियों को जीत लिया है। हनुमान जी राम नाम की कथा बड़े ही चाव से सुनते हैं। इस बीच भजनों पर झूमे श्रोताओं की तालियों से पंडाल गूंज उठा। चारों ओर जय श्रीराम व जय वीर हनुमान के जयघोष हुए। श्रद्धालुओं ने महाआरती की। प्रसाद वितरण किया गया। संचालन प्रमोद रोरा ने किया।
इस बीच सेवानिवृत डीआईजी शिवकुमार वाष्र्णेय व डीआईओएस श्यामा कुमार समेत सुनील ब्रेड, तनुज गुरू, गोविंद इलेक्ट्रॉनिक्स, डॉ. अरविंद कुमार, संजय सांख्यधर, गोपाल सराफ, भूंशकर गुप्ता, विपिन वाष्र्णेय व सचिन कुमार नन्हा आदि रहे।
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राज्यमंत्री समेत अन्य भाजपाइयों ने भी किया कथा का रसपान
बहजोई। श्रीराम कथा के पंडाल में पहुंचकर राज्यमंत्री गुलाब देवी समेत पूर्व विधायक अजीत कुमार राजू, कमल कुमार कमल, मंजू दिलेर चौहान, विकास वाष्र्णेय, भुवनेश राघव, नीरज वाष्र्णेय आदि ने भी कथा का रसपान किया।
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श्रीराम कथा का रसपान करने कई जिलों से आए श्रोता
बहजोई। हीरादेवी तोताराम कन्या इंटर कॉलेज परिसर में 19 अप्रैल तक चलने वाले श्रीराम कथा के बखान के छठवें दिन जिला संभल समेत बुलंदशहर, अलीगढ़, अमरोहा व बदायूं से श्रोता आए।