संभल/चंदौसी। गांव से लेकर शहर तक बुखार पीड़ितों की कोरोना जांच में देरी करते हुए उपचार कराने के मामले सामने आ रहे हैं। इलाज में भी मनमानी हावी है। जिन मरीजों के लिए ग्लूकोज आवश्यक नहीं है, उन्हें भी बोतल चढ़ाई जा रही है। इससे मरीजों की हालत बिगड़ी है। ऐसे पीड़ित चंदौसी के सरकारी अस्पताल तक पहुंचे हैं।
चंदौसी सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया कि अपंजीकृत चिकित्सक उन मरीजों को भी ग्लूकोज की बोतल चढ़ा रहे हैं जो मुंह से भोजन ले सकते हैं। अगर मरीज के फेफड़ों में पहले से कोई संक्रमण है तो अनावश्यक तौर पर ग्लूकोज चढ़ाए जाने से कई बार फेफड़ों में दिल के करीब तक पानी पहुंच जाता है।
इससे निमोनिया का खतरा बढ़ता है। कई बार फेफड़े संक्रमित होने से मरीज की हालत बिगड़ती है। अनावश्यक तौर पर ग्लूकोज चढ़ाए जाने से जिन मरीजों की हालत बिगड़ी है उनमें दस दिन में पांच मरीज चंदौसी के सरकारी अस्पताल आ चुके हैं। ऐसे मरीजों को उपचार से राहत मिली है लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी बात यही है कि प्रत्येक मरीज को बुखार ने आने पर अपने घर के करीबी सरकारी अस्पताल या फिर योग्य चिकित्सक से उपचार लेना है।