मुरादाबाद। जामा मस्जिद चौराहा स्थित रहमत पब्लिक स्कूल में शनिवार को आयोजित पसमांदा मुस्लिम सम्मेलन में पिछड़े व कमजोर तबके के मुसलमानों को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही इस समाज का वोट हासिल करने के लिए सामंती सोच की राजनीतिक पार्टियों से सतर्क रहने का भी आह्वान किया गया।
सम्मेलन में पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने कहा कि 16 साल के लंबे संघर्ष के बाद जब हमने पसमांदा मुसलमानों की समस्याओं को लेकर देश में जन आंदोलन खड़ा किया तो जमींदारी सोच रखने वाली राजनीतिक पार्टियों, उनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सामंती सोच के मौलानाओं व नेताओं को तकलीफ हो रही है। देश व प्रदेश में पसमांदा मिशन को 85 प्रतिशत पसमांदा मुसलमानों तक पहुंचाने का काम किया गया है। उनके लिए माहौल बनाया तो तथाकथित संगठन और उनके नेता पसमांदा हितैषी बनकर पसमांदा मुसलमानों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। संगठन बना रहे हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा। उन्होंने कहा कि जब पसमांदा मुसलमान अपना हक पाने के करीब होते हैं तो पसमांदा दुश्मन सोच के लोग इस्लाम की दुहाई देकर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास करते हैं। हम पसमांदा मुसलमानों की बदहाली को लेकर समाज में व्याप्त भेदभाव पूर्णनीति और दुर्व्यवस्था के खिलाफ जंग लड़ रहे है। हमें खुशी है कि देश के प्रधानमंत्री से लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों और पूरे देश में इसकी चर्चा हो रही है।
अनीस मंसूरी ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब हमारे इस आंदोलन को कामयाबी हासिल होगी। इस दौरान फिरासत हुसैन गामा, अनवार अब्बासी, मोहम्मद तालिब अंसारी, शाकिर अली राईनी, साजिद मंसूरी, डॉ. हसन सलमानी, जमशेद कुरैशी एडवोकेट, जहूर मालिक, तस्लीम पहलवान, फहीम मंसूरी, महबूब आलम अंसारी, अरहम अली अंसारी आदि मौजूद रहे।
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पसमांदा मुसलमान का समाप्त हो रहा पुश्तैनी कारोबार
मुरादाबाद। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने कहा कि देश में मुसलमानों की कुल आबादी का 85 प्रतिशत पसमांदा मुसलमान हैं। केंद्र और राज्य की सरकारों ने भी इनका शोषण किया है। सरकारों की अनदेखी के कारण इनके पुश्तैनी कारोबार समाप्त हो गए हैं। आज पसमांदा मुसलमान भुखमरी के शिकार हैं। इनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। सरकारों के पास इन पसमांदा मुसलमानों के विकास के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। वह सम्मेलन के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।