सिरसी(संभल)। कस्बा के मोहल्ला शर्की में मदरसा जमाए इमाम मेहंदी में हुई मजलिस में वकार मेहंदी और उनके साथियों ने मर्सिया पढ़ा। मजलिस में हजरत इमाम हसन की शहादत के बारे में सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना शबाब मेहंदी जाफरी ने कहा कि सऊदी अरब के मदीना शहर में स्थित जन्नतुल बकी नामक कब्रिस्तान में नबी-ए-करीम की बेटी फात्मा जहरा और उनके बेटे इमाम हसन एवं अन्य मासूमीन और सहाबियों के मजारात बने हुए थे। करीब 100 साल पहले आज ही के दिन आले साउद ने उन्हें शहीद कर दिया था। उनकी याद में हर साल आज के दिन शोक मनाया जाता है।
मजलिस के आखिर में फात्मा जहरा और उनके बेटे हजरत इमाम हसन के मसाइब बयान करते हुए कहा कि जालिमों ने फात्मा जहरा के ऊपर जलता हुआ दरवाजा गिरा दिया था, जिससे वह जख्मी हो गई थीं। बाद में उनकी शहादत हो गई। उनके बेटे हजरत इमाम हसन को जालिमों ने नबी ए करीम के बराबर में दफन नहीं होने दिया था। शहादत की बात सुनकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद ताबूत का जुलूस बरामद हुआ। जिसमें अंजुमन हाशमी और अंजुमन सफीना-ए-अजा ने नोहा ख्वानी की। जुलूस इमाम बारगाह शर्की सादात में पहुंचकर संपन्न हुआ।