चंदौसी। जनपद न्यायालय चंदौसी स्थित स्व. अजीत सिंह एडवोकेट सभागार में अधिवक्ताओं के लिए आयकर विवरणी दाखिल करना क्यों आवश्यक है विषय पर अधिवक्ता परिषद ब्रज जनपद इकाई संभल द्वारा स्वाध्याय मंडल का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता कर अधिवक्ता विभोर कुमार बंसल ने बताया कि जिन लोगों की व्यक्तिगत आय 12 लाख रुपये वार्षिक तक है, वे शून्य कर के दायरे में आते हैं, लेकिन यदि किसी व्यक्ति की आय चार लाख रुपये वार्षिक से अधिक है तो
आयकर विवरणी दाखिल करना आवश्यक है। ताकि वास्तविक स्थिति पता चल सके। ऐसा न करने पर अधिकतम 10 हजार रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई अधिवक्ता वकालत के अतिरिक्त अन्य कोई व्यावसायिक कार्य करता है तो उससे होने वाली आय भी उसकी वार्षिक आय में जोड़ी जाएगी।
उन्होंने अधिवक्ताओं को अपनी आय-व्यय का नियमित लेखा-जोखा रखने की सलाह दी, जिससे शुद्ध आय का सही आकलन हो सके। इससे न केवल आय का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, बल्कि पूंजी व परिसंपत्तियों के निर्माण में भी मदद मिलती है। साथ ही बैंक से ऋण लेने में भी सुविधा होती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन की स्थिति में भी आयकर विवरणी दाखिल करना आवश्यक हो जाता है, अन्यथा निर्धारित सीमा से अधिक लेन-देन पर बैंक खाते फ्रीज किए जा सकते हैं।
इस अवसर पर श्रीगोपाल शर्मा, विष्णु शर्मा, अमरीश अग्रवाल, सचिन गुप्ता, चरण सिंह, रजनी शर्मा, रिंकी, विनीत कुमार, यश गौतम, यशपाल राणा सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे। विषय प्रस्तुतिकरण स्वाध्याय मंडल प्रभारी विक्रम सिंह ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव शर्मा तथा संचालन प्रवीण गुप्ता ने किया।