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Sambhal News: दिल्ली के मैक्स सुपर हॉस्पिटल पर पांच लाख का जुर्माना लगाया

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चंदौसी (संभल)। जिला उपभोक्ता आयोग ने इलाज में लापरवाही, निर्धारित पैकेज से अधिक धनराशि वसूलने और इलाज से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न कराने के मामले में दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह राशि सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर अदा करने के आदेश दिए हैं। तय अवधि में भुगतान न होने पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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असमोली क्षेत्र के गांव नगला खोकर निवासी नेमपाल सिंह ने अपनी पत्नी भाग्यवती के हृदय रोग के इलाज के लिए देवकी देवी फाउंडेशन द्वारा संचालित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल साकेत में भर्ती कराया था। आरोप है कि 31 अगस्त 2021 को हृदय के राइट एंट्रीयम में स्थित मांस को सर्जरी के माध्यम से निकालने के बाद मरीज का राइट वेंट्रिकल अक्रियशील हो गया, जिससे रिकवरी धीमी पड़ गई।
परिवादी के अनुसार अस्पताल ने इलाज के लिए तीन लाख रुपये का पैकेज बताया था, लेकिन बाद में उनसे 11 लाख 80 हजार 795 रुपये वसूल लिए गए। करीब 14-15 दिन तक भर्ती रखने के बाद हालत में सुधार न होने पर मरीज को घर ले जाने के लिए कह दिया गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले दिन 21 सितंबर 2021 को भाग्यवती की मृत्यु हो गई। आरोप है कि अस्पताल ने इलाज से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए।
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इसके बाद नेमपाल सिंह ने उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग संभल में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने आयोग को बताया कि ऑपरेशन सही तरीके से किया गया था। इस पर आयोग ने ऑपरेशन से पहले और बाद की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
आयोग के अनुसार अस्पताल ने पहले किसी भी दस्तावेज के होने से इनकार किया। बाद में आयोग के आदेश पर ऑपरेशन से पूर्व की जांच रिपोर्ट दाखिल की गई, लेकिन बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद ऑपरेशन के बाद की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आयोग ने देवकी देवी फाउंडेशन और मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक/अध्यक्ष को आदेश दिया कि वे परिवादी नेमपाल सिंह को चिकित्सकीय उपेक्षा के लिए पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करें। साथ ही 50 हजार रुपये मानसिक कष्ट और आर्थिक हानि तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे।
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