संभल। धन की देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए लोग तैयार हैं। घरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। दीपावली में महालक्ष्मी की पूजा करने से परिवार में सुख एवं समृद्धि आती है। दिवाली का त्योहार विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास के पहले दिन अमावस्या को मनाया जाता है। दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त बृहस्पतिवार (चार नवंबर) को 06:08 बजे से 08:04 मिनट तक रहेगा। वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) में यह पूजन करना शुभ रहेगा। स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन लक्ष्मी की स्थिरता के लिए किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य शोभित शास्त्री ने बताया कि ब्रह्म पुराण के अनुसार इस दिन रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवा गणेश सहित मकानों में यंत्र-तंत्र लक्ष्मी माता विचरण करती हैं। इसीलिए इस दिन घर के द्वार को खूब साफ-सुथरा करके सजाया जाता है। दीपावली मनाने से श्री लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर के स्थायी रूप से निवास करती हैं। कार्तिक अमावस्या को भगवान श्री रामचंद्र जी 14 वर्ष का वनवास भोग करके आसुरी प्रवृत्तियों के प्रतीक रावण का संहार कर अयोध्या पधारे थे।
भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के प्रतीक मिश्रपुरी के मुताबिक अयोध्यावासियों ने राम के राज्य रोहन पर दीपमाला जलाकर कर महोत्सव मनाया था। इसलिए हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से दीपावली भी प्रमुख है। इस दिन उज्जैन सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक भी हुआ था। विक्रमी संवत का आरंभ भी तभी से माना जाता है, यह नए वर्ष का प्रथम दिन भी है। आज के दिन व्यापारी अपने बही-खाते बदलते हैं तथा अपने वर्ष के लाभ हानि का ब्यौरा तैयार करते हैं। दीपावली के दिन आकाश दीप जलाने की प्रथा है। दीपावली अमावस्या से पितरों की रात आरंभ होती है।