प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में अपने वादे के मुताबिक किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज की माफी का एलान कर दिया है। इसके तहत किसानों का एक लाख रुपये तक का ऋण माफ होगा। सरकार के इस फैसले पर कुछ किसानों ने संतोष जताया है तो कई किसानों और किसान प्रतिनिधियों ने इसे किसानों के साथ धोखा बताया है।
उपनिबंधक (सहकारी समितियां) योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि संभल जिले में सवा छह बीघा का एक एकड़ माना जाता है। एक से ढाई एकड़ जमीन वाले किसानों को सीमांत और 2.5 एकड़ से पांच एकड़ जमीन वाले किसानों को लघु सीमांत किसान की श्रेणी में रखा जाता है। इस तरह जिले में करीब 15 हजार सीमांत किसान है।
जिन पर करीब 80 करोड़ रुपये तक का ऋण बकाया है। हालांकि अभी शासनादेश नहीं मिला है, जिसके कारण अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। जब सरकुलर आएगा, तभी कुछ स्पष्ट कहा जा सकता है। इधर एक लाख रुपये तक की कर्ज माफी विपक्षियों के गले नहीं उतर रही हैं, कुछ किसान संगठन भी इसे छलावा बता रहे हैं।
यह सभी योजनाएं समाजवादी पार्टी की है। समाजवादी पार्टी इन योजनाओं का लाभ पहले भी किसानों को दे चुकी है और लेकिन केंद्र भाजपा की सरकार होने के बाद समाजवादी पार्टी का सहयोग नहीं किया। फिरोज खां, जिलाध्यक्ष
भाजपा ने संकल्प पत्र में जो वादा किया था। उसके तहत योगी सरकार ने एक लाख रुपये तक का किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। 2 करोड़ 15 लाख किसानों को फायदा पहुंचेगा। भाजपा ही गरीब, मजूदर और किसानों की सच्ची हितैषी पार्टी है। राजेश सिंघल, जिलाध्यक्ष भाजपा।
चुनाव से पहले भाजपा ने किसानों के कर्ज माफ करने की बात कही थी। लेकिन मात्र एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ कर किसानों को लॉलीपा दिया है। यह किसानों के साथ अन्याय हुआ है। सरकार अपने वायदे को पूरा नहीं कर सकी। धर्मेन्द्र कुमार जिलाध्यक्ष बसपा
भाजपा की प्रदेश सरकार ने जो कर्ज माफ किया, आधा अधूरा किया है, किसानों का पूरा कर्ज ही माफ किया जाना चाहिए था लेकिन कुछ किसानों को लाभ तो पहुंचेगा ही, इसलिए यूपी सरकार का यह कदम सराहनीय है। -विमलेश कुमारी जिलाध्यक्ष कांग्रेस संभल