इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्मा सकती है क्योंकि मौका चुनाव आसन्न हैं और सभी राजनीतिक दल हर छोटी बड़ी घटना पर नजर बनाए हुए हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही बसपा के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि घटना की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। उन्होंने कहा यदि प्रभावी कार्रवाई दोषियों पर नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा।
वहीं दलितों की राजनीति में सक्रिय रविशंकर भारती ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
राष्ट्रीय मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमित गौतम ने कहा कि दलितों के साथ कई स्थानों पर भेदभाव किया जाता है। इस तरह की घटनाएं पहले भी हुईं हैं। यदि दलित किशोरी को न्याय नहीं मिला तो उनका संगठन आंदोलन करेगा। इस संबंध में सोमवार को संगठन का प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों से मिलेगा। उन्हें ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद भी यदि कड़ी कार्रवाई न की गई तो प्रदर्शन किया जाएगा।
जातिगत भेदभाव से जुड़ा मामला है। प्रशासन कड़ी काईवाई करे।
धर्मेंद्र कुमार, बसपा जिलाध्यक्ष।
मैं झांसी में भाजपा कार्यसमिति की बैठक हूं। मुझे घटना की पूरी जानकारी नहीं है लेकिन यदि जातिगत भेदभाव का मुद्दा है प्रशासन जांच करे और हकीकत के आधार पर कार्रवाई करे।
मंजू दिलेर, प्रदेश मंत्री भाजपा।
कांग्रेस हर पीड़ित के साथ है। इस मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद संगठन की बैठक में अगले कदम के बारे में सोमवार को निर्णय लिया जाएगा।
तौकीर, शहर कांग्रेस के अध्यक्ष।
दलित संगठनों ने की घटना की निंदा
चंदौसी/जुनावई(ब्यूरो)। गंगुर्रा गांव में दलित किशोरी को डूंडा बाबा के मंदिर पर पानी पीने से रोकने की घटना ने सामाजिक सद्भाव को झटका दिया है। इससे दलित संगठनों ने गुस्से का इजहार किया है। दलित एकता मंच के मंडल प्रभारी रितेश कुमार एडवोकेट ने कहाकि हाईटेक युग में जहां छुआछूत जैसे शब्दों का ही कोई स्थान नहीं है लेकिन फिर भी रुढ़िवादी विचारधारा में फंसे कुछ लोग आज भी दलितों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझते हुए उन्हें हैंडपंप से पानी तक पीने नहीं दे रहे हैं।
यह घटना वाकई निंदनीय है। अंबेडकर युवक संघ के जिला महासचिव रविंद्र कुमार टिंकू ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि दलितों के साथ अत्याचार के पीछे सिर्फ दूषित मानसिकता ही है। गांव देहात में अभी भी लोग बदलने को तैयार नहीं है। प्रदेशभर में जहां देखो वहां दलितों का उत्पीड़न, दुष्कर्म आदि के मामले सामने आ रहे हैं। यह वह कर्म हैं, जिससे दलित समाज हिंदू धर्म को ही छोड़ने को तैयार हो जाता है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ताकि समाज में बिखराव पैदा न हो सके।