इमाम हुसैन की याद में रविवार को सिरसी में चुप ताजिए का जुलूस निकाला गया। अजाखाना शाहिद हुसैन में मजलिस हुई। मौलाना हसीनुजमा ने मजलिस को खिताब किया। खुर्शीद सिरसवी व हमनवाओं ने सोजख्वानी की। जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ अजाखानाए कला गर्बी जाकर समाप्त हुआ।
लोगों ने जुलजनाह व ऊंटों की आमारियों के आगे मरसियां पढ़ा। दूसरे शहरों के लोग भी सिरसी पहुंचकर जुलूस में शामिल हुए। मरसिया सुनकर आंख नम हो गईं। उन्हें कर्बला का मंजर याद आ गया। जुलूस में जगह-जगह सबीलें लगाई गईं। इमामबारगाह कला गर्बी में जुलूस पहुंचने के बाद अंजुमन हुसैनी ने अपना तारीखी नोहा पढ़ा।
अंजुमन जुल्फेकार हैदरी ने नोहाख्वानी की। इस मौके पर तौकीर हैदर जाफरी, फरहद, काजी हुसैन रजा, मौलाना मुनव्वर, इकतेदार मेहंदी, मौलाना चांद, मौलाना एहतेशाम, हाजी आसिफ, चौधरी फैजान, शाहकार हैदर, मौलाना शमीम, जियाउल हसन, खुर्शीद, मुसाहिब हुसैन, हाशिम पहलवान, चौधरी उरुज आलम, चौधरी आरिफ अली, तौसीफ, उर्फी आदि रहे।