शहर से सटे नूरियो सराय गांव में कागजी विकास हुआ है। मौके की हकीकत सरकारी दावों की कलई खोल रही है। आवास योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों को नहीं मिला। अपात्रों ने मजा मारा है। पात्र व्यक्ति कई आवासों के लिए तरस रहे हैं।
नूरियोसराय गांव के हरिओम का मकान कच्चा है। नरेश के मकान पर पक्की छत नहीं है। सीमेंट की चादर डाल कर काम चलाया जा रहा है। दौलत और राजेश का मकान कच्चा है। सबी उल्ला और वजीरुल हसन किराये पर रहते हैं उनके पास अपना मकान नहीं है। गांव में अपात्रों को इंदिरा आवास मिल गए।
पात्र वंचित रह गए। ग्राम प्रधान राशिद ने बताया कि आवास की पात्रता सूची में जिसके नाम थे उन्हें लाभ मिला है। पात्रता सूची प्रधान नहीं बनाते, अधिकारी बनाते हैं। उन्होंने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 55 सड़कें बनवाईं है। लेकिन गांव के लोग बताते हैं कि जो भी विकास हुआ है वह प्रधान ने अपने चहेतों के क्षेत्र में कराया गया है।
एक इलाका ऐसा भी है जहां पर खड़ंजे टूटे फूटे हैं। नालियों का पानी सड़कों पर आ रहा है और लोगों को आने जाने में बेहद परेशानी है। गांव में बिजली तो है लेकिन आती नहीं है। तार जर्जर हैं। सरकारी योजनाओं में 377 शौचालय बनाए गए हैं। लेकिन तमाम लोग ऐसे हैं जो अभी इन शौचालयों का प्रयोग स्टोर के रूप में कर रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर एक मात्र एएनएम केंद्र पर पुआल सुखाया जा रहा है।