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Sambhal News: संभल बवाल में आरोपी दो महिलाओं समेत 15 उपद्रवियों की जमानत याचिका खारिज

Fri, 31 Jan 2025 12:43 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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चंदौसी(संभल)।
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संभल की शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे को लेकर हुए बवाल में दर्ज मुकदमों में बृहस्पतिवार को 41 उपद्रवियों के जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई हुई। इनमें से 15 आरोपियों के जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिए गए। जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। जबकि शेष 26 प्रार्थनापत्रों पर अग्रिम तिथि के लिए स्थगन लगाया गया। न्यायालय ने इन जमानत प्रार्थनापत्रों पर चार से सात फरवरी के बीच सुनवाई की तारीख दी है।न्यायालय अपर जिला सत्र न्यायाधीश/रेप केसेस एंड पॉक्सो संभल स्थित चंदौसी निर्भय नारायण राय के न्यायालय में दोपहर 12.30 बजे सुनवाई शुरू हुई। सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी को सहयोग करने के लिए सभी शासकीय अधिवक्ता न्यायालय में मौजूद रहे।
सबसे पहले संभल कोतवाली के अपराध संख्या 333 सन् 2024 में आरोपी आमिर व समीर की ओर से बहस करते हुए जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट की ओर से पक्ष रखा गया। इसके बाद इसी अपराध संख्या में याकूब, सजाउद्दीन उर्फ सज्जू, मो. रिहान, मो. अली, शारिक, नईम, मो. गुलफाम, मो. सलीम, तहजीव, मो. फिरोज और मो. शादाब की ओर से अलग-अलग अधिवक्ताओं ने अपने-अपने जमानत प्रार्थनापत्र पर बहस की। इसके अलावा दो महिलाएं रुकइया व फरहाना की ओर से उनके अधिवक्ता ने जमानत प्रार्थनापत्र पर बहस की और कहा कि रुकइया की उम्र 65 साल है और वह विभिन्न बीमारियों से ग्रसित है। जिस पर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राहुल दीक्षित द्वारा तर्क दिया गया कि आयु व रोग से संबंधित कोई भी प्रमाणपत्र न्यायालय में दाखिल नहीं किया गया है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि न्यायालय ने अधिवक्ता जफर अली के आरोपियों द्वारा अपनी सुरक्षा में किए गए बचाव और बचाव में पथराव करने की बात को गंभीरता से लिया।
साटा के गिरोह के सदस्यों के दंगे में शामिल होने को लेकर हुई बहस
जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में शारिक साटा गिरोह ने बड़ी साजिश रची थी। साटा गिरोह के दो सदस्य मुल्ला अफरोज और वारिस को जेल भेजा जा चुका है। बृहस्पतिवार को न्यायालय में हुई बहस में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दंगे में साटा गिरोह के सदस्यों के शामिल होने का भी तर्क रखा।
विदेशी खोखा कारतूस भी रहा बहस का विषय
अभियोजन द्वारा बताया गया कि जामा मस्जिद के पीछे मिले विदेशी खोखा व कारतूस को दंगे में विदेशी ताकतों के शामिल होने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। इस मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया था। बृहस्पतिवार को जमानत अर्जी पर हुई सुनवाई के दौरान भी विदेशी खोखा व कारतूस को लेकर बहस हुई।
न्यायालय में लैपटॉप लाने पर हुई नोकझोंक
संभल बवाल के 41 आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में लैपटॉप लाए जाने पर अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं ने विरोध किया। तीखी नोकझोंक हुई। इस मामले में आरोपी के अधिवक्ता लैपटॉप पर कुछ तस्वीरें और वीडियो न्यायालय के समक्ष लाना चाहते थे। अभियोजन पक्ष के विरोध किए जाने पर लैपटॉप को कोर्ट से बाहर कर दिया गया।
आरोपी के एक अधिवक्ता के दंगे में शामिल होने का उठा सवाल
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी द्वारा आरोपियों की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र पर बहस कर रहे अधिवक्ता पर इस बात का सवाल उठाया गया था कि आरोपी के अधिवक्ता के खि खिलाफ भी इसी दंगे में पुलिस विवेचना कर रही है और उनका मोबाइल भी पुलिस ने जब्त कर रखा है। इस पर भी तीखी नोकझोंक हुई।
सीसीटीवी फुटेज का भी दिया हवाला
चंदौसी। बहस में सीसीटीवी फुटेज का भी हवाला दिया गया। जिसमें आरोपियों के अधिवक्ता ने कहा कि ऐसी कोई फुटेज नहीं है। जिसमें जमानत प्रार्थना पत्र के आरोपियों को दंगा करते, फायरिंग करते या पथराव करते हुए दिखाया गया है। वहीं अभियोजन का कहना था कि टीवी चैनलों तक पर दंगा करते हुए लोग दिखाए गए हैं।
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निषेधाज्ञा लागू होने पर भारी संख्या में पहुंचे लोग
चंदौसी। अभियोजन की तरफ से कहा गया कि शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस ने पहले से ही निषेधाज्ञा लागू कर रखी थी। तो 24 नवंबर को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भारी संख्या में लोग इकट्ठा क्यों हुए। न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के दौरान इस पर भी बहस की गई।
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