संभल के सौधन गांव में बना प्राचीन किला।
शहंशाह शाहजहां की सल्तनत में संभल व मुरादाबाद के गवर्नर रहे रूस्तम खान दक्खनी ने संभल जिले के सौंधन में एक किले का निर्माण कराया था । यह किला स्थापत्य कला की खूबसूरती और तत्कालीन दौर की यादगार निशानियों में से एक है। किले का निर्माण 1645 ई. में हुआ था। किले के निकट ही एक मस्जिद भी बनवाई थी। देखरेख के अभाव में किले की हालत जर्जर होती जा रही है। आएदिन ईटें गिरती रहती हैं।
संभल जिले के सौधन गांव में बना ऐतहासिक किला बेहतरीन नक्काशी और स्थापत्य की वजह से आकर्षण का केंद्र रहा है। किले की शाही इमारत होने के कारण इसका महत्व तो था ही, साथ ही किसी आक्रमण आदि के समय में भी फिरोजपुर संभल की बजाय इस किले में रुकना काफी सुरक्षित माना जाता था। संभल के लेखक एम उस्मान द्वारा लिखी गई किताब तुर्क और संभल में इसका जिक्र है। किताब में लिखे इतिहास के मुताबिक शहजादा खुर्रम को जब दक्षिण की मुहिम पर रवाना किया तो शहजादे के साथ मुकर्रब खान दक्खनी को भी भेजा। मुकर्रब खान ने दक्षिण और कंधार की लड़ाइयों में जबरदस्त कारनामे अंजाम दिए। जब शहजादा खुर्रम, शंहशाह शाहजहां के लकब से तख्तशीन हुआ तो उसने मुकर्रब खान को फीरोज जंगबहादुर रूस्तम खान का खिताब देकर 1632-33 में संभल का गर्वनर बना दिया था। शाहजहां की सल्तनत की ओर से रूस्तम खान दक्खनी 25 वर्ष तक संभल व मुरादाबाद के गर्वनर रहे।
1634 ई में कठेरियों के सरगना राजा रामसुख ने तराई इलाके में बगावत कर दी तो कुमायूं के राजा ने शाहजहां से सहायता मांगी थी। शाहजहां ने रूस्तम खान दक्खनी को बगावत कुचलने के लिए भेजा। युद्ध में राजासुख मारा गया। उसके बाद रूस्तम खान ने राजा रामसुख के किले चौपला पर कब्जा कर लिया था।