सिरसी। इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में आयोजित पांच रोजा मजलिसों की तीसरी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हसीन अख्तर ने समाज की तरक्की और सुधार में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज को बेहतर बनाने में जितनी भूमिका पुरुष की है, उतनी ही भूमिका महिला की भी है। एक पढ़ी-लिखी लड़की आने वाली सात नस्लों को सुधार देती है।
मौलाना ने कहा कि नबी-ए-करीम हजरत रसूले खुदा की बेटी जनाबे फातिमा जहरा और हजरत अली की बेटी जनाबे जैनब के पास लड़कियां शिक्षा ग्रहण करने के लिए आती थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में अरब में लड़कियों के पैदा होते ही उन्हें मार देने की प्रथा थी। नबी-ए-करीम ने इस कुप्रथा को समाप्त किया और अपनी बेटी जनाबे फातिमा जहरा की परवरिश मां-बाप की तरह की।
मजलिस के आखिर में मौलाना ने कर्बला के मसाइब बयान किए। उन्होंने बताया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन के छह माह के बेटे हजरत अली असगर को भी जालिमों ने प्यासा ही शहीद कर दिया था। यह प्रसंग सुनकर अजादार भावुक होकर रो पड़े।
मजलिस में वकार मेहंदी, खावर रजा, असकरी रजा जाफरी, मोहम्मद असगर, अली कबीर उर्फ अजमल और उनके साथियों ने मर्सिया पढ़ा। इसके बाद अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, अंजुमन हैदरी, हाशमी और हुसैनी के सदस्यों ने नौहाख्वानी की।