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Sambhal News: संसार से पार होने का श्रेष्ठ उपाय भगवान की शरण में जाना

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चंदौसी। गीता सत्संग भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन कथाव्यास पंडित प्रशांत कुमार मिश्र ने कहा कि संसार से पार होने का श्रेष्ठ उपाय भगवान की शरण में जाना है। उन्होंने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के प्रसंग सुनाए। श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
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परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के श्रवण से राजा परीक्षित के भीतर यह दृढ़ भाव उत्पन्न हो गया कि वे शरीर नहीं, आत्मा हैं। तक्षक शरीर को डसेगा, आत्मा को नहीं। परीक्षित ने अंतिम समय में भगवान के श्रीचरणों में ध्यान लगाकर परमपद प्राप्त किया। कथाव्यास ने कहा कि जो अपना सर्वस्व भगवान को समर्पित कर देता है, भगवान भी उसके जीवन को अपने संरक्षण में ले लेते हैं।
सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि अत्यंत निर्धन होने के बावजूद सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। भगवान से मिलने जाते समय उनके मन में धन मांगने की इच्छा नहीं थी, बल्कि श्रीकृष्ण के श्रीचरणों के दर्शन की अभिलाषा थी। भगवान ने सुदामा के दुख को अपना मानकर उनके घर को धन-धान्य से भर दिया।
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कथा के दौरान नवयोगेश्वर संवाद और अवधूतोपाख्यान के प्रसंग भी सुनाए गए। मुख्य यजमान दिवाकर पाठक के साथ यथार्थ कृष्ण पाठक, अनुपम शर्मा, मनोज कुमार, सत्यवीर सिंह, सुधांशु उपाध्याय, हर्ष शर्मा, रविंद्र शर्मा, देवकी नंदन, संजय पारासरी, यतीश शर्मा, माधव मिश्र आदि मौजूद रहे।
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