गुरुवार की सुबह सात बजे से गाजियाबाद में स्थापित 41वीं पीएसी बटालियन के जवानों ने गंगा में बहे छात्रों की तलाश शुरू की थी। सवा आठ बजे विशाल (18) पुत्र अमरीश का शव घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर गंगा में झाड़ी के अंदर फंसा हुआ मिला। जबकि मुनेंद्र (17) पुत्र किशन यादव का शव नौ बजे करीब घटनास्थल से 100 मीटर दूर गंगा में नीचे मिट्टी के अंदर दबा हुआ मिला।
हरिबाबा बांध गंगा घाट पर नहाते समय बहे दोनों छात्रों के शव दूसरे दिन मिल गए हैं। पीएसी के जवानों ने गुरुवार की सुबह सात बजे से तलाश शुरू की थी। शव मिलने की सूचना छात्रों के परिजनों को हुई तो कोहराम मच गया। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया तो रजपुरा थाना पुलिस ने पंचनामा भर शव सुपुर्द कर दिए।
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गुरुवार की सुबह सात बजे से गाजियाबाद में स्थापित 41वीं पीएसी बटालियन के जवानों ने गंगा में बहे छात्रों की तलाश शुरू की थी। सवा आठ बजे विशाल (18) पुत्र अमरीश का शव घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर गंगा में झाड़ी के अंदर फंसा हुआ मिला। जबकि मुनेंद्र (17) पुत्र किशन यादव का शव नौ बजे करीब घटनास्थल से 100 मीटर दूर गंगा में नीचे मिट्टी के अंदर दबा हुआ मिला है।
मालूम हो बहजोई थाना क्षेत्र के किसौली गांव निवासी मोरध्वज अपने बेटे कुनाल का मुंडन संस्कार कराने के लिए रजपुरा थाना क्षेत्र के हरिबाबा बांध गंगाघाट पर गए थे। मुंडन संस्कार के दौरान गंगाघाट पर भंडारा किया जाना था। छह ट्रैक्टर-ट्राली, कार व बाइकों में सवार होकर करीब 300 लोग गंगाघाट पर पहुंचे थे।
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इसी दौरान मोरध्वज का भतीजा मुनेंद्र और गांव निवासी विशाल, दुर्गेश और कौशल गंगा में नहाने लगे थे। यह चारो लोग डूबने लगे। चीखपुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने रस्सी गंगा में फेंकी तो दुर्गेश और कौशल रस्सी पकड़कर बाहर आ गए लेकिन मुनेंद्र और विशाल बह गए थे।
परिजनों के अलावा पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों से तलाश कराई लेकिन बुधवार की देर शाम तक कोई पता नहीं चला था। गुरुवार को पीएसी के जवानों ने तलाश की तो दोनों छात्रों के शव मिले हैं। परिजनों का रोरो कर बुरा हाल हो गया। पीड़ित परिजनों ने बताया कि मुनेंद्र कक्षा 10वीं और विशाल बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र था। गांव में दोनों छात्रों के शवों का अंतिम संस्कार शाम को कर दिया गया है।