संभल। मोहल्ला किला मियां सराय निवासी शाहिद हुसैन का परिवार करीब 40 साल से रावण और मेघनाद के पुतले तैयार करने का काम कर रहा है। शाहिद हुसैन की मृत्यु के बाद उनके बेटे आसिफ की देखरेख में पुतले तैयार किए जाते हैं। आसिफ ने बताया कि रावण और मेघनाद के पुतले संभल जिले के शहर, कस्बा और देहात क्षेत्र के अलावा मुरादाबाद के कुंदरकी भी जाते हैं।
मोहल्ला किला मियां सराय निवासी आसिफ के अनुसार, पूर्व में उनके पिता शाहिद हुसैन रावण और मेघनाद के पुतलों को तैयार करते थे। जिसमें परिवार के लोगों के साथ-साथ आसिफ भी सहयोग करते थे। शाहिद हुसैन की तीन साल पहले मौत हो गई तो पुतले तैयार कराने की जिम्मेदारी आसिफ के कंधों पर आ गई। रोजगार के लिए अब आसिफ परिवार के सदस्यों और मजदूरों के साथ पुतले तैयार करने में जुटते हैं। आसिफ ने बताया कि रावण और मेघनाद के पुतले संभल जिले के संभल, हजरतनगर गढ़ी, बहजोई, हयातनगर, खासपुर, सौंधन के अलावा मुरादाबाद जिले के कुंदरकी भी जाते हैं। इस बार दशहरा के मेले के लिए रावण और मेघनाद के पुतलों को लगभग तैयार कर लिया गया है।
डेढ़ माह पहले से शुरू होता है पुतले तैयार करने का काम
दशहरा मेले के लिए रावण और मेघनाद के पुतले तैयार करने का काम करीब डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाता है। जिसके लिए मजदूरों को भी लगाया जाता है। पुतले तैयार करने में कुछ काम आसिफ और उनके परिवार के सदस्य करते हैं जबकि बाकी कार्य मजूदरों का होता है। आसिफ ने बताया कि इस बार भी रावण और मेघनाद के 10 पुतले तैयार किए गए हैं।
अलग-अलग होती है रावण और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई
रावण और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई में भी फर्क होता है। आसिफ ने बताया कि रावण के पुतले की ऊंचाई 30 फीट और 35 फीट होती है। जबकि मेघनाद का पुतला 25 फीट का ही होता है। दोनों तरह के पुतलों की कीमत भी अलग-अलग होती है। संवाद