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गुरेठा में मां भगवती के मन्दिर की गाथा

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धनारी (संभल)। क्षेत्र के गुरेठा में मां भगवती के मंदिर की अनूठी गाथा है। एक किसान को सपने में मां भगवती के दर्शन हुए, इसके बाद उसने मंदिर का निर्माण कराया गया था। जिससे किसान के घर में पुत्र ने जन्म लिया था। इसलिए लोगों की यहां अटूट आस्था है। मां भगवती के दर्शन के बाद मनोकामना पूरी होती है।
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ग्रामीणों के अनुसार मां भगवती के मंदिर स्थल पर चार सौ वर्ष पूर्व ठाकुरों की बस्ती हुआ करती थी। बस्ती के बीच देवी का एक छोटा मठ बना था। गांव में बीमारी फैल गई थी। लोग मरने लगे। लोग बीमारी से बचने को गांव से पलायन करने लगे थे। लोग पलायन के दौरान गांव में बने देवी के मठ को अपने साथ ले जाने के लिए उखाड़ने लगे थे, लेकिन मठ अपनी जगह से नहीं उखड़ा तो वह तोड़ कर अपने साथ ले गये। जहां बस्ती की जगह बीरान हो गया। इसके बाद मठ से कुछ दूरी पर अहीर जाति के लोग दूसरे गांव से आकर बसने लगे।

बस्ती होने के बाद गुरेठा नाम रख दिया गया। पचास वर्ष पूर्व गुरेठा में रहने वाले हकीम सिंह को सपने में मां भगवती ने दर्शन देकर कहा कि टूटे पड़े मठ के पास मंदिर बना दें तो पुत्र की प्राप्ति होगी। यह सुनते ही अचानक नींट टूट गई और स्वप्न के बारे में सोचने लगे। जहां एक मंदिर का निर्माण शुरू कराते ही उनकी पत्नी गर्भवती हो गई। जिसने पुत्र को जन्म दिया। मंदिर के निर्माण के बाद लोगों की आस्था के बारे में चर्चा होने लगी। आसपास व दूर दराज से आकर मां दर्शन मात्र से सभी के काम पूरे होने लगे। लोगों की आस्था बढ़ने लगी। मंदिर के चढ़ावे से भगवान शिव व हनुमान के मंदिर का निर्माण हो गया। धीरे धीरे एक धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया। अटूट आस्था रखने पर नवरात्रि में मंदिर पर श्रद्धालु लाइन में लग कर दर्शन व पूजा अर्चना करते है। डॉ.पुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि मंदिर में पूजा अर्चना के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते हैं। लोगो की आस्था बढ़ती जा रही है।
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