संभल। मनरेगा के अंतर्गत काम करने वाले मजदूरों को तत्परता के साथ डिजीटल भुगतान किया जाता है। जिससे उनके खातों में समय से पैसा पहुंच जाए। लेकिन एक साल पहले किए गए डिजिटल भुगतान का रुपया सैकड़ों मजदूरों के खातों में नहीं पहुंच सका है। जिसके चलते मजदूर अब अपना मेहनताना सचिव और प्रधान से मांग रहे हैं। जिसमें विकास खंड गुन्नौर की कई ग्राम पंचायतों में तकरीबन यही हाल है।
ग्राम पंचायत भौनानगला में पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए कामों का करीब पचास मजदूरों को साढ़े तीन लाख रुपये नहीं आया। जिसकी शिकायत ग्राम प्रधान ने ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों से की है। लेकिन तकनीकी कारणों के चलते कोई समाधान नहीं हो सका। भकरौली ग्राम पंचायत में करीब 75 मजदूरों के खातों में पिछले वर्ष डिजीटल भुगतान किया गया था।
जिसका करीब ढाई लाख रुपये उनके खातों में नहीं नहीं पहुंचा और न ही रिजेक्शन की सूची में पहुंचा है। उदरनपुर अमतनगर में करीब सौ मजदूरों का पांच लाख रुपये खातों में नहीं आया। यही हाल ग्राम पंचायत महमूदपुर का है जहां 12 मजदूरों का भुगतान खातों में नहीं आया।
कच्ची मिट्टी का काम करने वाले यह मजदूर अब ग्राम प्रधान ने पैैसे की मांग कर रहे हैं। परियोजना निदेशक हरेंद्र सिंह ने बताया कि डिजिटल भुगतान होता है। अगर खातों में नहीं जाए तो रिजेक्ट सूची में चला जाता है। जिसे दोबारा भेजा जाता है। अगर फिर भी नहीं पहुंचा है तो इसे दिखवाएंगे।