गंगा-जमुनी दोआब के बीच बसे सहारनपुर में अनेक काल अपना कुछ न कुछ अंश छोड़ गए हैं। वेदों में उल्लेख के अनुसार यह क्षेत्र ब्रह्मऋषि के नाम से जाना जाता था। यहां खुजनावर में कुषाण काल यानी करीब 2000 साल पुराना टीला है, जिसके गर्भ में अनेक ऐतिहासिक राज छिपे होने की संभावना है। इसी तरह शहर में बाबा लालदास रोड पर फुलवारी आश्रम है, जहां पर तीन दिन शहीद-ए-आजम भगत सिंह भी छिपे रहे थे और अंग्रेज शासक भी उनको यहां आकर ढूंढ नहीं पाए थे।
गंगोह रोड पर ऐतिहासिक म्हाड़ी स्थल है, जहां हर वर्ष मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं। पुराना लोहा बाजार में शहीद स्मारक है। यहां पेड़ लगा है, जिस पर अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को फांसी भी दी है। इसी तरह जनपद में अनेक ऐतिहासिक स्थान हैं, जो अनदेखी का शिकार हैं।