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मशरूम की खेती से आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं

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सहारनपुर। महिलाओं की आय को बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र उन्हें मशरूम की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए न सिर्फ महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि उनके उत्पाद के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। मशरूम से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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जनपद में करीब 250 से अधिक मशरूम उत्पादक हैं। जो प्रतिवर्ष करीब 400 टन मशरूम का उत्पादन करते हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, हरिद्वार, देहरादून, पटियाला, अंबाला आदि शहरों तक सहारनपुर की मशरूम पहुंच रही है। जिले में वर्ष भर मशरूम की खेती सफलतापूर्वक होती है। इसमें सफेद बटन मशरूम, ढिंगरी मशरूम और मिल्की मशरूम शामिल हैं। इसमें सफेद बटन मशरूम की खेती अक्तूबर माह से फरवरी-मार्च तक, ढिंगरी मशरूम की खेती मार्च से मई तक और मिल्की मशरूम की खेती जून से सितंबर महीने तक होती है। इनके साथ ही महिलाओं को ऑस्टर, गेनोडर्मा, शिटाके आदि मशरूम की खेती के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा, साथ ही उनको मशरूम की खेती की तकनीक, लगने वाली बीमारियों से लेकर उसकी बिक्री और उसमें वैल्यू एडिशन आदि जानकारी भी दी जाती है।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण
मशरूम के खेती के लिए जनपद के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। तकनीकी प्रशिक्षण के बाद उनके यहां परंपरागत के साथ ही शिटाके, गेनोडर्मा जैसी औषधीय महत्व की मशरूम की खेती कराई जाएगी। इसके लिए देहरादून की एक महिला मशरूम उद्यमी का भी सहयोग लिया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत बनाए जा रही खाद्य प्रसंस्करण प्रयोगशाला बनायी जा रही है। इसमें मशरूम के विभिन्न उत्पाद बनाने की तकनीक भी सिखाई जाएगी।
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- डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र।
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