- जिले में 50 से ज्यादा महिलाएं ले चुकी हैं खिलौने बनाने का प्रशिक्षण
- स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने खिलौने बनाकर बेचना शुरू किया
सहारनपुर। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रह हैं, चाहे वह शहर की रहने वाली हों या फिर गांव की। अब महिलाओं ने वुड़ कार्विंग और लकड़ी के खिलौने बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। ऐसे कई स्वयं सहायता समूह जिले में संचालित हैं, जिनसे जुड़ी 50 से ज्यादा महिलाएं लकड़ी के खिलौने बना रही हैं और इनको बेचकर मुनाफा भी कमा रही हैं। हालांकि अभी इनको उपयुक्त बाजार की दरकार है, जहां इनके द्वारा बनाए खिलौनों की बिक्री हो सके। यह महिलाएं उनके लिए प्रेरणास्रोत हैं जो महिलाएं परिस्थितियों के आगे बेबस हो जाती हैं और आगे बढ़ने की नहीं सोच पाती हैं। विश्व महिला दिवस पर पेश है खिलौने बनाने वाली महिलाओं के बारे में रिपोर्ट...
अच्छा है मुनाफा, बढ़ेगा कारोबार
नागल क्षेत्र के गांव खजूरवाला निवासी सुमन पत्नी अमित कुमार कहती हैं कि खिलौने बनाने का कार्य गांव में ही शुरू किया। उनके स्वयं सहायता समूह में चार महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अभी उत्पाद कम बना रहे हैं, क्योंकि पहले तो लॉकडाउन लग गया था और उसके बाद स्वयं सहायता समूहों को पोषाहार वितरण में भी लगा दिया गया। जो खिलौने बनाती हैं, उनको बिक्री के लिए ब्लाक कार्यालयों पर स्टाल लगाती हैं, लेकिन उपयुक्त बाजार की दरकार है। मुनाफा अच्छा है, भविष्य में इस कारोबार को बढ़ाया जाएगा।
40 हजार खर्च कर शुरू किया था काम
गांव फतेहपुर कला निवासी सुकरमा पत्नी नेत्रपाल बताती हैं कि करीब एक साल से खिलौने बनाने का कार्य कर रही हैं। 40 हजार रुपये खर्च करके काम शुरू किया था। पहले इन खिलौने को बेचने के लिए सही प्लेटफार्म नहीं मिल पा रहा था, लेकिन कुछ समय से सरकार की तरफ से होने वाले कार्यक्रमों में प्रदर्शनी और मेले में स्टाल लगा रहे हैं। वह लकड़ी के कार, ट्रैक्टर ट्राली, गुल्लक आदि बनाते हैं। बाजार में व्यापारी से संपर्क तो करते हैं।
सहारनपुर से लाती हैं कच्चा माल
गांव अलीपुरा निवासी कविता पत्नी योगेश कुमार ने बताया कि नवंबर 2020 में 13 दिन का प्रशिक्षण लेने के बाद खिलौने बनाना शुरू किया। बाजार में दुकानों पर सप्लाई करती हैं। कार, ट्रेन, पेन पॉट, पालना आदि बनाती हैं। काम शुरू करने के लिए कच्चा माल सहारनपुर लाती हैं। उनके स्वयं सहायता समूह में 11 महिलाएं जुड़ी हैं, जिनमें से पांच महिलाएं खिलौने बना रही हैं। हाल ही 500 ट्रेनें बनाने का ऑर्डर मिला है।
गांव अलीपुरा निवासी सरिता पत्नी शिवकुमार बताती हैं कि तीन महीना पूर्व प्रशिक्षण लेने के बाद खिलौने बनाने का कार्य शुरू किया। पहले 10 हजार का कच्चा माल मंगाया। उससे बने खिलौने बिक गए और अच्छा मुनाफा हुआ तो और कच्चा माल मंगाकर खिलौने बनाए। गांव में कॉस्मैटिक की दुकान कर रखी है, वहां भी खिलौने रखकर बेचती हैं। सरसावा ब्लाक कार्यालय पर दो बार और गांधी पार्क में हुई प्रदर्शनी में स्टॉल लगाया था। कुछ व्यापारियों से ऑर्डर पर खिलौने बनाकर देने के लिए भी संपर्क किया है, धीरे धीरे काम बढ़ेगा।