सहारनपुर के बड़गांव की शब्बीरपुर जातीय हिंसा में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए चंदपुर के लोगों की रिहाई की मांग को लेकर गांव की महिलाएं और पुरुषों ने बृहस्पतिवार को थाने का घेराव किया।
थाना प्रभारी ने महिलाओं को समझा बुझाकर शांत किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने दो दिनों में पुलिस द्वारा जेल भेजे गए सभी बेगुनाहों को रिहा नहीं किया तो वह अपने छोटे बच्चों के साथ थाने पहुंच कर आमरण अनशन शुरू कर देंगी।
बता दें कि 23 मई को शब्बीरपुर में बसपा सुप्रीमो मायावती के कार्यक्रम के बाद भड़की जातीय हिंसा में पुलिस द्वारा चंदपुर गांव निवासी 13 लोगों को जेल भेज दिया गया था।
प्रशासन द्वारा एक माह तक बेगुनाहों को रिहा न करने से क्षुब्ध चंदपुर के महिला पुरुषों ने बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने बड़गांव थाने का घेराव कर घंटों हंगामा किया।
इस दौरान गुस्साई महिलाओं का कहना था कि उनके बेगुनाह पति व बेटों को जेल में होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने लगी हैं। खेतों में कार्य करने वाले कैसे अपराधी हो सकते हैं।
हंगामे की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी मुनेंद्र सिंह ने बेगुनाहों को शीघ्र रिहा कराने का आश्वासन देकर उन्हें बमुश्किल शांत किया। महिलाओं ने एसओ से साफ कहा कि वे राजपूत महिलाएं हैं और अपने बेकसूर सुहाग और बच्चों को बचाने के लिए किसी भी आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगी।
उधर इतना सब कुछ होने के बाद एसपी देहात विद्या सागर मिश्रा थाने के दफ्तर में ही बैठे रहे। उन्होंने प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच तक जाना भी गंवारा नहीं समझा। इसे लेकर महिलाओं में काफी रोष देखने को मिला।
इस मौके पर रणदीप पुंडीर, रुक्मेश, बाला, सलोचना, कुन्ती, ऊषा, मछला, दयावती, संयोगिता, कुसुम, मधु, प्रेम, शिमला, पूनम आदि मौजूद रहे।