सहारनपुर। फरवरी में अचानक बढ़े तापमान का असर गेहूं की उत्पादकता पर पड़ने की आशंका है। इससे गेहूं की अगेती फसल में दूधिया स्टेज में गेहूं के दानों का विकास होगा प्रभावित होगा। साथ ही पछेती गेहूं फसल पर भी विपरीत असर पड़ेगा।
जनपद में लगभग 1.20 लाख हेक्टेयर रकबे में गेहूं की खेती है। गेहूं की फसल को इस समय 10 से 17 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत है, जबकि जनपद में इस समय 10 से 27 डिग्री सेल्सियस तक तापमान चल रहा है। इसका सीधा असर गेहूं की उत्पादकता पर पड़ेगा। जिला कृषि अधिकारी कपिल कुमार मावी के अनुसार जनवरी और फरवरी में सामान्य से कम बारिश और उच्च तापमान के कारण गेहूं की फसल पर काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा। साथ ही सरसों और चने जैसी फसलें भी जल्दी पक सकती हैं।
उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल के लिए अगले 10-15 दिनों तक न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से कम रहना चाहिए। अगर यह स्थिति नहीं रहती है तो उत्पादन में काफी गिरावट आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार विशेष रूप से पश्चिमी यूपी में प्रति हेक्टेयर दो से तीन क्विंटल तक गेहूं का उत्पादन कम हो सकती है। किसान गेहूं की फसल को बचाने के लिए खेत में हल्की सिंचाई कर नमी बनाए रखें।