सहारनपुर। लगातार गिरता भूगर्भ जल का स्तर और दूषित होती नदियां व तालाब पृथ्वी पर जीवन के लिए खतरे की घंटी है। यही वजह है कि सरकार जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल श्रोतों और तालाबों के पुर्नजीवन आदि के लिए कई योजनाएं चला रही है। जल शक्ति अभियान भी शुरू किया गया। जनपद में इसके लिए कुछ हद तक कार्य भी हुए हैं, लेकिन ओवरऑल देखा जाए तो ज्यादातर योजनाएं फाइलों से बाहर तो आईं, लेकिन उनका असर नगण्य ही नजर आया है। लगातार बैठकें होती रही हैं, जिनमें योजनाओं पर काम करने की बड़ी-बड़ी बातें होती रहीं, लेकिन धरातल पर उन कार्यों की गति या तो बेहद धीमी है या फिर है ही नहीं पेश है रिपोर्ट...
विद्यालयों में लगने थे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
गिरते भूगर्भ जल स्तर को ऊपर लाने जनपद के 500 विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने थे। जहां के विद्यालयों में सिस्टम लगने थे उनमें विकास खंड साढ़ौली कदीम, मुजफ्फराबाद, पुवांरका, बलियाखेड़ी, सरसावा, नकुड़, गंगोह, रामपुर मनिहारान, नागल, नानौता, देवबंद क्षेत्र में पड़ने सभी विद्यालय शामिल थे। इनके लिए ग्राम पंचायतों का सहयोग लिया गया, लेकिन अनेक विद्यालयों में अभी तक सिस्टम नहीं लगे हैं।
अनिवार्य रूप से लगने थे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
महानगर के 300 मीटर और उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों में अनिवार्य रूप से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की बात अधिकारियों के द्वारा कही गई थी। अप्रैल 2021 में नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि सिस्टम नहीं लगाने वाले भवन स्वामियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए गुरु नानक इंटर कॉलेज को मॉडल बनाया गया था, लेकिन अब भी अनेक भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लग सके हैं। हालांकि महानगर के दस सामुदायिक व सार्वजनिक शौचालयों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जा चुके हैं। करीब 25-26 अन्य पर भी सिस्टम जल्द लगाने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक नहीं लगे हैं।
पार्कों में भी नहीं लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
वर्षा जल संचय को लेकर अब जनपद के 80 पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की कवायद 2021 में शुरू की गई थी। जिला विकास विभाग और जल निगम की ओर से संयुक्त रूप से जिम्मेदारी दी गई थी। पहले चरण में 80 छोटे-बड़े पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का खाका तैयार हो जाने की बात अधिकारियों ने कही थी। बाकायदा मानक भी दिया गया था। जल संचयन प्रणाली के लिए 70 से 80 मीटर गहरा और छह से आठ इंच चौड़ा बोरिंग, पानी के एकत्र होने के लिए पार्क में चैंबर बनाए जाने थे।
ज्यादातर तालाबों की हालत खराब
जिले में 6042 तालाब हैं। इनमें से बड़ी संख्या में तालाबों पर कब्जे बरकरार हैं, जबकि प्रशासन की ओर से तालाबों पर कब्जे हटवाने और सुंदरीकरण का दावे किए जा रहे हैं। कुछ ही तालाबों पर काम हो पाया है। नगर निगम भी तालाबों के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण पर कार्य कर रहा है, लेकिन कई जगहों पर जीर्णोद्धार की गुणवत्ता बेहद खराब है। हाल ही में नौ पार्कों पर काम शुरू कर दिए जाने की बात कही जा रही है। 13 तालाबों का जीर्णोद्घार पूर्व में करा दिए जाने का दावा है। इनमें गांव चकहरेटी में तीन, मढ़, मानकमऊ व हलालपुर के दो-दो तथा दरामिलकाना, सड़क दूधली, रामनगर व ग्वालिरा में एक-एक तालाब शामिल है।
तहसील कुल तालाब कब्जे
सदर 1835 74
नकुड़ 1190 143
देवबंद 1241 152
बेहट 545 40
रामपुर मनिहारान 1231 194
योग 6042 605