बुधवार को देवबंद पहुंचे महाराष्ट्र भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष वसीम खान ने कहा कि वंदे मातरम का नारा देकर हमारे न जाने कितने महापुरुषों ने देश की आजादी के लिए कुर्बानियां दी हैं। उस नारे में एक जज्बा भरा हुआ है। इसलिए मुझे लगता है कि हिंदुस्तान के मुसलमानों को इससे कोई परहेज नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मौलाना अरशद मदनी बड़े आलिम-ए-दीन हैं उनको सियासी चीजों में ज्यादा न उलझकर इससे दूरी बनानी चाहिए और जो दीन की बातें हैं लोगों को बतानी चाहिए और जो खिदमत के काम हैं उनको वही करने चाहिए। खान ने कहा कि हर चीज को सियासत से नहीं जोड़ना चाहिए, मुसलमानों से अपील करने के लिए बहुत सारी चीजें हैं।
कहा कि मौलाना अरशद मदनी हों या उनसे जुड़े अन्य लोग हमेशा सियासी मुद्दों में हस्तक्षेप करते हैं और कहीं न कहीं मुसलमानों को बहकाने का काम करते हैं, वह मजहब को सुरक्षा कवच बनाकर और शरीयत का बहाना लेकर मुसलमानों के जज्बातों से खेलते हैं। उन्होंने कहा कि शरीयत अलग है और मजहब अलग है, जब हम खुद को भारतीय कहते हैं तो हमारी संयुक्त तौर पर जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं।