सहारनपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज और एसबीडी जिला अस्पताल में एमआरआई के लिए भवन तो बना है, लेकिन इसमें मशीन आज तक नहीं लग पाई है। मरीज निजी अस्पतालों में हजारों रुपये खर्च कर एमआरआई कराने के लिए मजबूर हैं। पिछले साल शासन से मशीन स्वीकृत भी हो गई।
जिले में सड़क हादसों का ग्राफ दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। हादसों में घायल होने के बाद अधिकांश मरीज निजी अस्पताल में जाने की बजाय जिला अस्पताल या फिर राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में जाते हैं। न्यूरो सर्जन नहीं होने के कारण घायलों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। इनमें कई मरीजों को एमआरआई की जरूरत होती है। एसबीडी जिला अस्पताल में पांच साल पहले भवन बन गया था।
उसमें कोविड टीकाकरण भी हुआ था, लेकिन इस भवन को अभी तक मशीन नहीं मिली है। यही हाल राजकीय मेडिकल कॉलेज का है। हालांकि, दोनों के लिए पिछले साल शासन से एमआरआई मशीन की स्वीकृति मिल गई थी। उम्मीद जगी थी कि अब मशीन जल्द मिल जाएगी। दो से तीन महीने हो गए, लेकिन अभी तक मशीन आने का कोई अता-पता नहीं है। ऐसे में मरीज परेशान हैं।
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एमआरआई मशीन को स्थापित कराने के लिए जगह की कोई कमी नहीं है। अब सिर्फ मशीन आने का इंतजार किया जा रहा है। मशीन आने से मरीजों को बाहर एमआरआई नहीं करानी पड़ेगी।
- डॉ. सुधीर राठी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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एमआरआई मशीन के लिए अलग से भवन बना हुआ है। जैसे ही मशीन प्राप्त होगी। उसे स्थापित कर जल्द शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. रामानंद, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल