सहारनपुर जिले से विधायक चुने जाने वाले किन्हीं सात प्रत्याशियों का मुकद्दर ईवीएम में बंद है, जिनका परिणाम 11 मार्च को आना है। किसके सिर सजेगा जीत का सेहरा और कौन खाएगा मात।
यह तो वक्त ही बताएगा, मगर पिछले 65 साल में जिले में 17 बार हुए विधान सभा के चुनाव और उप चुनाव का इतिहास उठाकर देखा जाए तो अभी तक कुल 59 लोग चुनकर विधान सभा पहुंचे हैं।
बेशक विधायक बने लोगों में 90 फीसदी पुरुष हों, मगर सबसे अधिक छह बार विधायक बनने का सौभाग्य महिला को मिला है। जनपद से अभी तक विधायक चुने गए लोगों की कुल संख्या 59 है, जिनमें से महिलाएं मात्र छह हैं।
यहां सबसे अधिक बार विमला राकेश को विधायक बनने का मौका मिला। उन्होंने अपना पहला चुनाव 1977 में हरौड़ा सीट से जनता पार्टी के टिकट पर जीता था। इसके बाद वह 1980, 1985, 1989, 1991 और एक बार 2003 में उप चुनाव में जीतीं।
उनके बाद पांच बार विधायक बनने वालों में महमूद अली खान का नाम शामिल है, जो पहले विधान सभा चुनाव 1952, 1957, 1967, 1969 और 1974 में विधायक बने।
इनके बाद ठाकुर यशपाल सिंह, शकुंतला देवी, राम सिंह मांडेबांस और महावीर सिंह को चार-चार बार विधायक बनने का मौका मिला। इनके अलावा जगदीश राणा, डॉ. धर्म सिंह सैनी, ठाकुर फूल सिंह, मो. असलम और कंवरपाल सिंह तीन-तीन बार विधायक चुने गए।
दो और एक बार विधायक चुने गए लोगों की फेहरिस्त लंबी है। उधर, जिले में अभी तक कुल छह महिलाएं विधायक चुनी गई हैं। सबसे पहले विधायक बनने वाली महिला शकुंतला देवी थी, जिन्होंने 1962 में सीट जीती थी।
हालांकि उन्होंने पहला चुनाव 1957 में लड़ा था। 1993 में शशी बाला पुंडीर और रानी देवलता यहां जिले से महिला के रूप में विधायक चुनी गईं। 1996 और 2002 में बसपा सुप्रीमो मायावती हरौड़ा सीट से दो बार विधायक चुनी गईं और सूबे की मुख्यमंत्री बनीं। छठा नाम सत्तो देवी का है,
जिन्होंने नागल सीट से उप चुनाव जीता था। सबसे हैरत की बात यह है कि जिले में विधायक बनी कुल छह महिलाओं में चार दलित रही हैं। जिनमें मायावती, विमला राकेश, शकुंतला देवी और सत्तोदेवी का नाम शामिल है।