फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मातम में बदलीं खुशियां: रमजान के पहले ही दिन मस्जिद से लौटकर बेटी को ढूंढ रहे थे पिता, कंकाल देखकर कांप गया कलेजा

Tue, 05 Apr 2022 02:34 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

सहारनपुर जिले में आवारा कुत्ते पहले भी कई जिंदगी लील चुके हैं। जिले में आए दिन कोई न कोई इन आवारा कुत्तों के शिकार बना रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। 
 
विज्ञापन
कुत्तों ने बच्ची को बनाया निवाला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सहारनपुर के जावेद के घर में पहले रमजान के दिन खुशी का माहौल था। नन्ही शिफा पिता के साथ मस्जिद जाने की जिद कर रही थी। पिता ने उसे गर्मी की बात कहकर घर पर रहने को कहा और मस्जिद चले गए। वहां से लौटे तो पांच साल की बेटी शिफा घर में नहीं थी।

विज्ञापन


पिता के बहुत ढूंढने पर भी जब वह नहीं मिली तो आसपास के लोगों से भी जानकारी की गई। घर से चंद ही मिनट की दूरी पर बच्ची का कंकाल पड़ा मिलने पर उनके होश उड़ गए। क्षेत्र के खूंखार और आवारा कुत्ते उनकी मासूम बच्ची को अपना निवाला बना चुके थे। एक कतरा मांस भी बच्ची के शरीर पर कुत्तों ने नहीं छोड़ा था। बच्ची की मौत के बाद रमजान की खुशियां मातम में बदल गईं। 

सहारनपुर जिले में आवारा कुत्ते पहले भी जिंदगी लील चुके हैं। जिले में आए दिन कोई न कोई इन आवारा कुत्तों के शिकार बन रहा है। प्रशासन की ओर से आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। एक वर्ष पूर्व नगर निगम ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया था, जो कुछ ही दिन बाद बंद कर दिया। शहर के अलावा देहात क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के आतंक से लोग दहशत में हैं। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: बड़ी कार्रवाई: शामली पुलिस ने संजीव जीवा गैंग के बदमाश को एके-47 के साथ दबोचा, 1300 से भी ज्यादा कारतूस बरामद

विज्ञापन

बेहद होशियार बच्ची थी शिफा 
चिलकाना के गांव बुड्ढाखेड़ा में आवारा कुत्तों ने पांच वर्षीय शिफा को पुत्री जावेद को अपना निवाला बनाया है। एक साल पहले ही जावेद ने शिफा का एक स्कूल में दाखिला कराया था। शिफा नर्सरी कक्षा में पढ़ती थी। स्कूल संचालक नसीम अहमद ने बताया कि शिफा पढ़ाई में होशियार थी। अन्य बच्चों की अपेक्षा पढ़ाई की बातों को वह एकदम समझ जाती थी। उधर, रमजान माह में हुई घटना से परिवार की पर्व की खुशियां मातम में बदल गईं। इस घटना से ग्रामीण भी गमजदा हैं। 

हो चुकी हैं घटनाएं 
  • थाना मिर्जापुर के गांव पाडली में 12 वर्ष के एक बच्चे को कुत्तों के झुंड ने नोचकर खा लिया था। 
  • गंगोह क्षेत्र के गांव कुतुबखेडी में कूड़ा डालने जा रही महिला तथा एक बच्ची पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया था। 
  • गांव लखनौती में सफाई कर्मचारी महिला पर कुत्तों ने हमला कर गंभीर घायल कर दिया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।  
  • मल्हीपुर रोड पर घर के बाहर खेल रही दो साल की बच्चों को कुत्तों ने मौत के घाट उतार दिया था। 
  • मोहल्ला नूरबस्ती निवासी दस वर्षीय इशा को भी आवारा कुत्तों ने अपना निवाला बना लिया था। इसी तरह कई घटनाएं हो चुकी हैं।  
  
नगर निगम में पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी की तैनाती हो गई है। इसके अलावा हम एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बना चुके हैं। जल्द ही बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर कुत्तों को पकड़ा जाएगा। -ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें