एटीएस द्वारा पकड़े गए बांग्लादेशी पिता-पुत्र शातिर हैं। वह जल्द ही भारत छोड़कर भागने की फिराक में थे और उन्हें दिल्ली से फ्लाइट पकड़नी थी। अभी तक हुई जांच में यह बातें सामने आई हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक आरोपी तनवीर और उसका पिता उमर मोहम्मद उस्मान भारत में बांग्लादेशियों के अलावा रोहिंग्या की घुसपैठ कराने में मदद करते थे। इसके बदले वह मोटी रकम वसूलते थे। इतना ही नहीं, भारतीय नागरिकता के प्रमाणपत्र बनवाने में भी मदद करते थे। हाल ही में आरोपी बांग्लादेश भागने की फिराक में थे। इसके लिए वह दिल्ली से फ्लाइट पकड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन एटीएस ने इससे पहले ही आरोपियों को दबोच लिया। आरोपी कई देशों की यात्रा भी कर चुके हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह बातें सामने आई हैं।
गंगोह और देवबंद भी में रहे
आरोपी हर तीन माह में ठिकाना बदल लेते थे। नदीम कॉलोनी और एकता विहार कॉलोनी के अलावा आरोपी देवबंद, सरसावा और गंगोह में भी लंबे समय तक रहे हैं।
पड़ोसियों से नहीं रखते थे वास्ता
आरोपी एकता विहार कॉलोनी में भी रहे, जिस मकान में वह रहते थे, उसके बराबर में रहने वाले लोगों का कहना है कि पिता-पुत्र पड़ोसियों से ज्यादा मतलब नहीं रखते थे। कई बार रात में भी मकान पर नहीं आते थे। इनके यहां बाहरी लोगों का आना-जाना ज्यादा लगा रहता था।
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मुर्शीद का है मकान
जिस मकान में आरोपी रहते थे, पुलिस उसके मकान मालिक की तलाश कर रही है। हालांकि, पड़ोसियों को भी मकान मालिक के बारे में जानकारी नहीं है। सीओ प्रथम चंद्र प्रकाश शर्मा का कहना है कि शुरुआती जांच में पता चला कि मकान मालिक का नाम मुर्शीद है।
एक मीट फैक्टरी में काम करने की चर्चा
पिता-पुत्रों के एक मीट फैक्टरी में काम करने की चर्चा है। हालांकि, अभी अधिकारी इस बात को स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों आरोपी एक मीट फैक्टरी में लंबे समय से काम कर रहे थे।
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