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दहशतगर्दों के खिलाफ एकजुट हों

Tue, 05 Apr 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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Deoband in Saharanpur people said their prayers in the mosque in Rashidiya. - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के देवबंद में सऊदी अरब मक्का मुकर्रमा के इमाम-ए-हरम डा. सालेह बिन मोहम्मद अल तालिब ने मंगलवार को रशीदिया मस्जिद से लाखों की भीड़ को अमन और इंसानियत का पैगाम दिया। इसके साथ ही दहशतगर्दी की पुरजोर तरीके से मुखालिफत भी की।
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उन्होंने कहा कि इस्लाम एक अमन पसंद मजहब है। जिसका दहशतगर्दी से कोई ताल्लुक नहीं है। इसलिए बेगुनाहों की जान लेने वालों को मुसलमान नहीं कहा जा सकता। दहशतगर्दी और इस्लाम के अलग-अलग पहलू हैं।  

मंगलवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की दावत पर देवबंद पहुंचे इमाम-ए-हरम डा. सालेह बिन मोहम्मद अल तालिब ने रशीदिया मसजिद में अपने करीब 30 मिनट के संबोधन में कुरआन और सुन्नत के पैगाम को घर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया और कहा।
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 उन्होंने कहा कि हमारे उलेमा एवं बुजुर्गों ने कुरआन-ओ-हदीस की नि:स्वार्थ सेवा की। हमारी जिम्मेदारी है कि हम भी कुरआन और हदीस के पैगाम को अवाम तक पहुंचाएं। इमाम-ए-हरम ने दहशतगर्दी की पुरजोर मुखालफत की।

उन्होंने दुनिया के तमाम दहशतगर्दों से निपटने के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि सऊदी अरब ने दहशतगर्दी के खात्मे के लिए मुस्लिम मुल्कों में इत्तेहाद पैदा किया है और इसके लिए वो लगातार कोशिशें कर रहा है। 

शांति का संदेश लेकर भारत दौरे पर आए सऊदी अरब हरमैन शरीफ के इमाम-ए-हरम डा. सालेह बिन मोहम्मद अल तालिब ने देवबंद की मसजिद रशीदिया में हुकुमत-ए-सऊदी अरब और वहां की अवाम की तरफ से सभी को सलाम पेश किया।

मंगलवार को इमाम-ए-हरम ने दारुल उलूम और इस्लामी तालीम पर अरबी भाषा में अपने ख्यालात का इजहार करते हुए कहा कि दारुल उलूम और उसके उलेमा ने हमेशा कुरआन व हदीस के पैगाम को आम करने के लिए भरपूर काम किया। जिसके चलते दारुल उलूम आलमी सतह पर एक मिसाली इदारा बना हुआ है।

उन्होंने अपने देवबंद आगमन तलबा और उस्तादों से मुलाकात को गर्व की बताते हुए कहा कि मेरी ख्वाहिश है कि अपनी सफों में इत्तेहाद (एकजुटता) पैदा करें। इमाम-ए-हरम डा. सालेह ने कहा कि इस्लाम कहीं भी नाइत्तेफाकी पैदा नहीं करता। हमारा इल्म का माध्यम अलग अलग हो सकता है लेकिन जो सहाबा-ए-कराम को तसलीम नहीं करता वो इस्लाम, कुरआन व हदीस को भी नहीं मानता।

इमाम-ए-हरम के अरबी भाषण का उर्दू अनुवाद दारुल उलूम के उस्ताद मौलाना शौकत बस्तवी ने किया। जबकि दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी की और से स्वागत भाषण मौलाना सलमान बिजनौरी ने पढ़ा।
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