शाकंभरी(सहारनपुर)। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी क्षेत्र में बृहस्पतिवार रात शिवालिक पहाड़ियों में हुई बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। पहाड़ियों से उतरे सैलाब की चपेट में आकर दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि प्रसाद की दुकान पर काम करने वाला नौकर भूरा देव पर सुरक्षित बाहर निकल गया। तेज बहाव में दर्जनों वाहन खिलौनों की तरह बह गए। कई दुकानें भी ध्वस्त हो गईं। लोगों ने ऊंचे स्थानों पर शरण लेकर अपनी जान बचाई।
मौसम में बदलाव को देखते हुए देर रात करीब 11:30 बजे शाकंभरी चौकी से श्रद्धालुओं को अलर्ट किया गया। इससे पहले कि श्रद्धालु संभल पाते करीब 12 बजे अचानक से शाकंभरी नदी (खोल) में भयंकर बाढ़ आ गई। तुकाराम धर्मशाला के सामने बना अस्थायी पुल बहकर 200 मीटर दूर तक जा पहुंचा। पुल का मलबा भूरादेव मंदिर के पास तक बिखरा पड़ा मिला। बाढ़ की चपेट में आकर श्रद्धालु सावित्री (65) निवासी गिद्दावली कला थाना खानपुर लक्सर जिला हरिद्वार और एक भिखारी महिला बह गई। इनके शव एक किमी दूर झाड़ियों में फंसे मिले। एक दुकान पर काम करने वाला गांव चौहुडपुर कला निवासी गूंगा भी बाढ़ में बह गया था, लेकिन वह भूरा देव पर सुरक्षित निकल गया।
पानी में चार ट्रैक्टर-ट्रॉली, दो बाइक, तीन कार, दो जेनरेटर, दो टाटा मैजिक समेत दर्जन बह गए। पहाड़ों से आए सैलाब का पानी सीधे मंदिर परिसर और मुख्य बाजार में घुसा। दुकानों में 3 से 4 फीट तक पानी भरने से किराना, प्रसाद, कपड़े और जनरल स्टोर के दुकानदारों को लाखों का नुकसान हुआ है। कई दुकानों का सामान पानी में बह गया। श्रद्धालुओं के ठहरने वाली कई धर्मशालाओं में भी पानी भर गया। अंबेहटा निवासी सुरेंद्र की कार भी बह गई। जिलाधिकारी अरविंद चौहान, एसएसपी अभिनंदन सिंह, एसडीएम मानवेंद्र सिंह, तहसीलदार विजय कुमार ने भी सिद्धपीठ पहुंच नुकसान और भविष्य के लिए सुरक्षा इंतजामों को परखा। आशंका जताई जा रही है कि पहाड़ों पर बादल फटने से पानी का सैलाब नीचे आया है।
बता दें, कि वर्ष 2022 में भी 14 सितंबर को सहारनपुर की शुगर मिल कॉलोनी निवासी सीमा की भी पानी की तेज धार में बहने से मौत हो गई थी। जबकि उनकी तीन बेटियां तान्या, मेघा, रिया को शंकराचार्य आश्रम के छात्रों ने बचा लिया था। मान्यता है कि बरसात के मौसम में एक बार बाढ़ का पानी सिद्धपीठ मां के दरबार के मुख्य द्वार पर सीढ़ियों को स्पर्श करके लौट जाता है, परंतु इस बार बरसात से पूर्व ही बाढ़ का पानी मंदिर के मुख्य द्वार को स्पर्श कर गया।
31 मई तक बंद रहेंगे माता के भवन के कपाट
मंदिर व्यवस्थापक राणा आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि मौसम को देखते हुए 29 मई से आगामी 31 मई तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। 1 जून को कपाट खोले जाएंगे। इसके अलावा भूरादेव मंदिर के कपाट भी यथावत बंद रहेंगे। एसडीएम बेहट मानवेंद्र सिंह ने बताया कि सिद्धपीठ में अस्थायी मेडिकल कैंप, पुलिस एवं प्रशासन के कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी चार स्थानों पर लगाई गई है। विद्युत निगम को तत्काल ही विद्युत व्यवस्था को सुचारु करने के लिए निर्देशित किया गया है। बाढ़ की सूचना मिलने पर सांसद इमरान मसूद, एमएलसी शाहनवाज खान भी मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। इस तबाही के बाद शुक्रवार को कोई भी वाहन आगे नहीं जाने दिया गया। श्रद्धालुओं को भी रोककर रखा गया।
पहाड़ों पर बारिश के कारण अचानक पानी नीचे आया है। इसमें दो महिलाओं की मौत हुई है। मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता दी जाएगी।
- अरविंद कुमार चौहान, डीएम
सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में बाढ़ में बहा ट्रैक्टर। संवाद
सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में बाढ़ में बहा ट्रैक्टर। संवाद
सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में बाढ़ में बहा ट्रैक्टर। संवाद
सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में बाढ़ में बहा ट्रैक्टर। संवाद