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मां शाकंभरी विश्वविद्यालय का खजाना खाली, आर्थिक तंगी से जूझ रहे अधिकारी

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सहारनपुर। मां शाकंभरी विश्वविद्यालय को लेकर प्रदेश सरकार ने जो गंभीरता और तेजी दिखाई थी वह अब धीमी पड़ गई है। आलम यह है कि विश्वविद्यालय का खजाना खाली है। ऐसे में विश्वविद्यालय के अधिकारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। वह किसी तरह व्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं।
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दो दिसंबर को गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुवांरका पहुंचकर विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया था। इसके बाद प्रोफेसर एचएस सिंह को कुलपति बनाकर भेेजा गया था। इसके बाद कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य की भी तैनाती की गई थी। प्रशासनिक भवन राजकीय महाविद्यालय पुवांरका के भवन में संचालित है, जिसके लिए स्टाफ भी महाविद्यालयों से लिया गया है। विश्वविद्यालय के लिए बनने वाले भवन के लिए करीब 50.43 एकड़ भूमि में बनने वाले भवनों के लिए सरकार ने 92 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे, लेकिन विश्वविद्यालय के अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए बजट भेजने में कंजूसी बरती जा रही है। विश्वविद्यालय द्वारा 20 जून से आयोजित की जा रही वार्षिक परीक्षाओं, कंप्यूटर, फर्नीचर आदि खर्चों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन से एक करोड़ रुपये से अधिक की मांग की थी, लेकिन शासन ने 6,66,000 रुपये भेजे। इतने से बजट में परीक्षाओं का आयोजन और अन्य जरूरतें पूरी करना विश्वविद्यालय के अधिकारियों के लिए मुश्किल भरा रहा है। विश्वविद्यालय अगले दो दिन में दोबारा पैसे की मांग शासन से करने वाला है। अधिकारी दस जुलाई तक और बजट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।
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वेतन मिलने में भी हो रही देरी
विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन मिलने में भी देरी हो रही है। एक अधिकारी ने बताया कि उनका वेतन दो-दो माह में आ रहा है, जिसकी वजह से भी वह परेशान हैं। इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय में भ्रमण के लिए आने वाले वीआईपी पर होने वाले खर्च भी उन्हें अपने स्तर से वहन करने पड़ रहे हैं।
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कर्मचारियों का भी टोटा, कार्य हो रहे प्रभावित
मां शाकंभरी विश्वविद्यालय के लिए शासन ने केवल कुलपति और कुलसचिव की तैनाती की है। प्रशासनिक भवन से जुड़े तमाम कार्यों को चलाने के लिए विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के मात्र सात कर्मचारियों को अटैच किया गया है। ऐसे में अनेक महत्वपूर्ण कार्य जैसे आगामी दिनों में होने वाले स्नातक के दाखिले, परीक्षा आदि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
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विश्वविद्यालय के लिए भवन निर्माण का कार्य निरंतर चल रहा है, जिसके लिए बजट की कमी नहीं है, लेकिन विश्वविद्यालय के अन्य खर्चे होते हैं। चूंकि यहां अभी शुरुआत है तो मैन पावर के साथ ही संसाधन जिसमें कंप्यूटर और उससे जुड़ी मशीनों की जरूरत है। विश्वविद्यालय ने करीब एक करोड़ रुपये की मांग शासन से की थी, लेकिन विश्वविद्यालय को केवल 6.66 लाख रुपये मिले। ऐेसे में आर्थिक तंगी है। लेकिन हम जल्द ही बजट के लिए फिर से मांग करने वाले हैं।
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प्रोफेसर एचएस सिंह, कुलपति, मां शाकंभरी विश्वविद्यालय।
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