सहारनपुर। बांस से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी तेजी से चल रही हैं। सीएफसी के लिए शासन ने 15 लाख रुपये और जारी कर दिए हैं, इससे सीएफसी पर बाकी मशीनों की खरीद और अन्य संसाधनों की खरीद की जाएगी। उम्मीद है कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह या फिर जनवरी में प्रशिक्षण शुरू होगा।
वुड कार्विंग में सहारनपुर का नाम देश दुनिया में मशहूर है, अब बांस के फर्नीचर और घरेलू उत्पाद बनाने में भी सहारनपुर का नाम होगा। इसी उद्देश्य से यूपी बांस मिशन के तहत बांस के उत्पाद तैयार करने के लिए कामन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) से प्रशिक्षण दिलाया जाना है।
बेहट के निकट वन विभाग की नर्सरी में सीएफसी का भवन तैयार हो गया है। एक साल पूर्व इसके निर्माण के लिए शासन से करीब नौ लाख रुपये की धनराशि जारी हुई थी, इससे प्रशिक्षण केंद्र में बांस बाजार का प्लेटफार्म आदि तैयार कराया और मध्य प्रदेश के देवास से पांच मशीनें मंगाई गईं है। वहीं, पिछले दिनों ही शासन ने 15 लाख रुपये और जारी किए हैं। सीएफसी के लिए अन्य जरूरी मशीनों की खरीद सहित अन्य कार्यों पर यह धनराशि खर्च की जानी है।
15 से 20 लोगों को मिलेगा एक बार में प्रशिक्षण
बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण नार्थ ईस्ट में स्थापित दो संस्थाओं के प्रशिक्षक देंगे। एक बार में 15 से 20 कारीगर एवं किसानों को यहां प्रशिक्षण मिलेगा। यहां बांस के फर्नीचर और घरेलू उपयोगी उत्पादों में कैंडल स्टैंड, फोटो फ्रेम, टब, ग्लास, कप, कटोरी, खाना रखने के बर्तन आदि बनाने का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
इन स्थानों पर बन रहे सीएफसी
यूपी बांस मिशन के तहत सहारनपुर, गोरखपुर, झांसी, बरेली, मिर्जापुर में सीएफसी का हो रहा है। झांसी की लाठी, वाराणसी की बांस डलिया, गोरखपुर की सूप डलिया और बरेली व सहारनपुर के वुड कार्विंग उद्योग को अहम मानते हुए यहां पर बांस से फर्नीचर व घरेलू उत्पादों के लिए प्रशिक्षण केंद्र बनाया जा रहा है। लखनऊ और सुल्तानपुर में भी इनके स्थापना की तैयारी है।
बांस के उत्पाद बनाने के लिए प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी चल रही हैं। शासन ने स्वीकृत बजट में दूसरी किस्त भेज दी। जल्दी ही अन्य मशीन खरीदी जाएंगी। दिसंबर माह के अंत या फिर जनवरी में प्रशिक्षण शुरू कराने का प्रयास है। - रणविजय सिंह, प्रभारी डीएफओ सहारनपुर।