कागजों में जोर-शोर से शुरू हुआ पुलिस का ट्रैफिक माह अब केवल दावों तक सिमट कर रह गया है। सड़कों पर पुलिसकर्मियों के सामने ही ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर की सड़कों पर तीन सवारी तो आम है।
इसके अलावा चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइट्स भी अब केवल दिखावे की ही रह गई हैं। यह हाल तब है, जब शहर की खूनी सड़कों परहर महीने सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। बावजूद इसके ट्रैफिक पुलिस केवल कागजी खानापूर्ति में ही जुटी है।
सहारनपुर सहित पूरे प्रदेश में नवंबर माह को ट्रैफिक सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। मगर, पुलिस की यह कवायद केवल कागजी और दावों वाली बनकर रह गई है। कुछ महीने पहले शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक लाइट्स भी लगाई गई।
मगर, ट्रैफिक माह में भी यह पुलिसकर्मी केवल मूकदर्शक की भूमिका में हैं। गलियों से लेकर चौराहों तक पुलिस मूकदर्शक की भूमिका में है। आपको बता दें कि सहारनपुर में प्रति माह औसतन 50 मौतें सड़क हादसे में होे रही हैं। इनमें ज्यादातर बिना हेलमेट वाले बाइक सवार शामिल होते हैं। पुलिस लोगों को जागरूक करने की बजाय केवल ग्रीन कार्ड बनाने तक में ही उलझी हुई है।
पुलिस नहीं लगा रही ट्रिपल राइडिंग पर रोक ः तीन सवारी पर रोक लगा पाने में पुलिस अब तक पूरी तरह फेल रही है।
सुबह से लेकर शाम तक दीवानी कचहरी, कलक्ट्रेट तिराहे, घंटाघर तिराहा सहित मुख्य चौराहों पर पुलिस के सामने ही बाइक पर तीन सवारी चुनौती देते हुए गुजरते हैं। मगर, पुलिस पूरी तरह बेपरवाह बनी रहती है। शहर में ट्रैफिक पुलिस की एक लंबी-चौड़ी फौज है।
सड़कों से नदारद ट्रैफिक पुलिस
कप्तान की मौजूदगी तक तो फिर भी हालात ठीक थे, मगर उनके छुट्टी पर जाते ही ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी बेहद लापरवाह हो गए हैं। यह हाल तब है जब ट्रैफिक माह चल रहा है।
लापरवाह पुलिसकर्मियों को चिह्नित किया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। ट्रैफिक माह को बेहद गंभीरता से मनाया जाना है। इसमें लोगों को जागरूक करने के लिए पहल करनी होगी। पुलिस के कामों की समीक्षा की जा रही है।
- मनोज तिवारी, एसएसपी