बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि को लेकर चल रहे विवाद में देवबंदी उलमा की तरफ से भी कोर्ट के बाहर बातचीत के जरिए मसले का हल तलाश करने वाला बयान आया है। जामिया तुल कुदसियात शिक्षा समिति के चेयरमैन मौलाना आमिर का कहना है कि अगर दोनों पक्ष (हिंदू-मुस्लिम) बैठकर इस पर रजामंद हों तो वहां हॉस्पिटल या कॉलेज बन जाए तो उसमें कोई हर्ज नहीं है।
अयोध्या मामले में लगातार हो रही बयानबाजी पर जामिया तुल कुदसियात शिक्षा समिति के चेयरमैन मौलाना आमिर ने कहा कि रोज इस पर नए-नए बयान आ रहे हैं, दरअसल बयान देने वाले लोग अपनी रोटियां सेंक कर रहे हैं और इनको कोई काम नहीं है।
जो काम कोर्ट कर दे उसको सभी को मानना चाहिए जो उल्टी सीधी बातें कर रहे हैं वो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यवाहक सदस्य मौलाना सलमान हुसैन नदवी ने कैसे कहा कि वहां मंदिर बना लेना चाहिए।
उनका यह कहना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्ष इस पर बैठकर रजामंदी बना लें और वहां हॉस्पिटल या कॉलेज बन जाए तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। किसी भी तरीके से यह झगड़ा खत्म होना चाहिए। लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं होगी।
क्योंकि अगर ऐसा होता है तो उसकी राजनीति खत्म हो जाएगी। असल तो भाजपा इस पर राजनीति कर रही है। चुनाव के वक्त मंदिर-मस्जिद का मसला लाकर ये सब लोगों को उलझा देते हैं।