सहारनपुर। प्रदेश में दस मार्च को मतगणना के बाद बनने वाली सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे युवाओं को ढेरों उम्मीदें हैं। परीक्षार्थी पारदर्शितापूर्ण परीक्षा तंत्र विकसित करने के साथ ही नकलविहीन परीक्षा संपन्न कराने की हिमायत करते हैं। उनका कहना है कि समय से परीक्षा हों और परिणाम भी एक निर्धारित अवधि के अंदर घोषित हो। नकल माफिया पर रासुका में कार्रवाई हो और परीक्षा शुल्क भी कम हो ताकि जेब पर बोझ ना पड़े।
25 किमी के दायरे में हो परीक्षा केंद्र
छुटमलपुर निवासी अमन गोयल का कहना है कि कई बार परीक्षा से संबंधित पिटीशन कोर्ट में दायर हो जाती है तो उस पर निर्णय की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होती। इसके परीक्षा में शामिल हुए युवाओं में असमंजस बना रहता है। इसके साथ ही सेंटर अधिकतम 25 किमी के अंदर बनाया जाना चाहिए। ज्यादा दूरी होने पर विशेषकर महिलाओं को काफी दिक्कत आती है और जाने जाने में भी काफी धन और समय का अपव्यय होता है। भर्तियों का विज्ञापन समय से प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाए। ताकि युवाओं को समय रहते इनकी जानकारी मिल सके।
समय से घोषित हो परीक्षा परिणाम
सरसावा के मोहल्ला हजारा निवासी एमकाम डिग्रीधारी स्वाति कांबोज का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या प्रतियोगी परीक्षाओं का परिणाम देर से घोषित होने की है। परिणाम घोषित होने में छह माह से एक साल तक का समय लगता है। ऐसे में उन्हें भविष्य में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए रास्ता नहीं मिलता। वे कहती हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में वसूला जाने वाला शुल्क लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे आर्थिक रुप से कमजोर प्रतियोगियों का परीक्षाओं में बैठना मुश्किल होता जा रहा है। सरकार को चाहिए कि इसे कम करे।
फार्म भरने के तीन साल बाद भी नहीं हुई परीक्षा
कंपीटिशन की तैयारी कर रहे गांव गंदेवड़ निवासी गौरव सिंघल का कहना है कि सरकार को प्रतियोगी परीक्षा के लिए ठोस पालिसी बनानी चाहिए। जिससे समय पर परीक्षा व समय पर रिजल्ट घोषित किया जा सके। उसने वर्ष 2019 में रेलवे के ग्रुप डी के लिए फार्म भरा था, लेकिन आज तक उसकी परीक्षा ही नहीं हुई है।
पारदर्शिता युक्त पालिसी लाए सरकार
चिलकाना के गांव फिरोजाबाद निवासी रोहित कुमार एसएससी की तैयारी कर रहा है। रोहित का कहना है कि सरकार को किसी भी तरह की भर्ती में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए। छात्र बड़ी मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं। परीक्षा के दौरान ही पेपर आउट होने से उनका मनोबल टूट जाता है। ऐसी सरकार की जरूरत है जो युवाओं को बिना किसी भेदभाव के नौकरी दे सके तथा उनका भविष्य सुधर सके।
पेपर आउट कराने वालों पर लगे रासुका
देवबंद के मोहल्ला कायस्थवाड़ा निवासी सारिका कश्यप का कहना है कि उसने सी टेट की परीक्षा की तैयारी के लिए काफी समय और धन खर्च किया। किंतु परीक्षा के दिन पेपर आउट होने से उसको काफी मानसिक परेशानी हुई। सरकार ने पेपर आउट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए दोबारा परीक्षा तो आयोजित करवाई, परंतु परीक्षा के दिन परीक्षा रद्द होने से जो मानसिक पीड़ा हुई उसकी भरपाई मुश्किल है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि किसी परीक्षा को स्थगित ना करने पड़े तथा पेपर आउट करने वालों के खिलाफ रासुका में कार्रवाई करे।
सारिका कश्यप- फोटो : SAHARANPUR
रोहित कुमार- फोटो : SAHARANPUR
गौरव सिंघल- फोटो : SAHARANPUR
स्वाति कांबोज- फोटो : SAHARANPUR