जिला अस्पताल में मरीज के स्ट्रेचर को रेंप पर चढ़ाते परिजन।
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सहारनपुर। जिला अस्पताल में बदइंतजामी और अव्यवस्थाएं इस कदर हावी हैं कि तीमारदारों को ही मरीज की स्ट्रेचर खींचनी पड़ती है। यह हाल तो तब है, जबकि लापरवाही को लेकर अस्पताल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है। बावजूद व्यवस्था में सुधार आने को तैयार नहीं है।
बुधवार को एसबीडी जिला अस्पताल में स्ट्रेचर पर लेटे मरीज को एक पुरुष और एक महिला ऐसे ही धकेलते नजर आए। रैंप पर स्ट्रेचर को चढ़ा पाने में मजबूर महिला का साथ देने के लिए पास में खड़े लोगों को आना पड़ा। इसी प्रकार चार लोग स्ट्रेचर पर गंभीर घायल युवक को खींचकर ले जाते नजर आए। कमरा संख्या 31 के पास भी कुछ दो तीमारदार अपने मरीज को व्हील चेयर पर ले जाते दिखे। जिला अस्पताल में यह रोज का हाल है। जिस पर चिकित्साधिकारियों का ध्यान नहीं जाता है। सबसे बड़ी समस्या उन तीमारदारों के साथ होती है, जो महिलाएं होती हैं या फिर मरीज के साथ अकेले होते हैं। सवाल यह उठता है कि यदि तीमारदार को ही यह सब करना है तो वार्ड ब्वॉय, अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, तृतीय श्रेणी कर्मचारी आदि किस काम के लिए हैं?
लापरवाही पर हो चुकी है कार्रवाई
वार्ड ब्वॉय की लापरवाही दो दिन पहले भी उजागर हो चुकी है, जब एक शव इमरजेंसी के बाहर काफी देर तक पड़ा रहा था। मामला सुर्खियों में आने के बाद अपर निदेशक (चिकित्सा)/प्रमुख अधीक्षक डॉ. एसके वार्ष्णेय ने तीन वार्ड ब्वॉय को निलंबित भी किया है।
मुख्यमंत्री के सख्त आदेश हैं कि गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाया जाए। स्ट्रेचर खींचने का कार्य सबसे पहले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का है। यदि वह नहीं है तो तृतीय श्रेणी कर्मचारी करेगा। यदि वह भी नहीं है तो द्वितीय श्रेणी या फिर मौके पर मौजूद चिकित्सक भी यह कार्य कर सकता है। -- डॉ. एसके वार्ष्णेय, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल।
जिला अस्पताल में मरीज को व्हीलचेयर पर खींचकर ले जाते तीमारदार।- फोटो : SAHARANPUR
जिला अस्पताल में मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाते तीमारदार।- फोटो : SAHARANPUR