- थाना मंडी के धोबीघाट क्षेत्र की है घटना
- परिजन बोले, दूध गर्म करने को लेकर हुआ था विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। थाना मंडी के धोबीघाट क्षेत्र में मंगलवार देर रात एक परिवार में तीन बहनों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला चिकित्सालय लाया गया। इनमें से एक किशोरी ने दम तोड़ दिया। बाकी दो किशोरियों को परिजन उपचार के लिए किसी अन्य अस्पताल ले गए। परिवार के कुछ लोगों का कहना कि दूध गर्म करने को लेकर हुए विवाद के बाद उन्होंने यह कदम उठाया, जबकि पुलिस अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।
धोबीघाट क्षेत्र में राजकुमार गुप्ता का परिवार रहता है। राजकुमार पेठा विक्रेता हैं और दुकान के ऊपर ही मकान में परिवार के सदस्य रहते हैं। मंगलवार रात साढ़े दस बजे के बाद मंडी पुलिस को सूचना मिली कि परिवार की तीन किशोरियों की हालत बिगड़ गई है। उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। कुछ देर के उपचार के बाद यहां 16 वर्षीय सूबी गुप्ता ने दम तोड़ दिया। उसके अलावा 14 वर्षीय बेटी मुस्कान और 12 वर्षीय परी को परिजन यहां से किसी अन्य अस्पताल ले गए।
बुधवार दोपहर सूबी के शव के पोस्टमार्टम के दौरान काफी पूछने पर परिवार के लोगों ने इतना ही बताया कि दूध गर्म करने को लेकर तीनों में विवाद हुआ था। इसके बाद उन्होंने घर पर ही रखा एक केमिकल पी लिया। इससे उनकी हालत बिगड़ गई। विवाद के दौरान किशोरियों की मां पूनम ने भी उन्हें समझाने की कोशिश की थी। थाना मंडी प्रभारी बीएस रावत ने बताया कि तीनों बहनों में आपसी विवाद के बाद ही यह घटना हुई है। विवाद का स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया कि मंडी पुलिस प्रकरण की विवेचना कर रही है। जांच जारी है।
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नागल के भलस्वा इस्सापुर में भी हुई थी ऐसी घटना
सहारनपुर। दो माह पहले ही नागल क्षेत्र के गांव भलस्वा इस्सापुर में भी तीन बहनों से जहर खा लिया था। उन तीनों बहनों में टीवी के रिमोट को लेकर विवाद हुआ था। इसके अलावा चार माह पहले बलियाखेड़ी क्षेत्र में एक परिवार के किशोर ने मनपसंद मोबाइल न लाने पर जहर खा लिया था।
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छोटी-छोटी बातों पर आपा खो रहे बच्चे और किशोर
सहारनपुर। छोटी छोटी बातों पर बच्चे और किशोर आपा खो रहे हैं। इस बारे में मनोरोग चिकित्सक डॉ. एजाज अहमद कहते हैं कि टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर जिस तरह की सामग्री को बच्चे और किशोर लगातार देखते और पढ़ते हैं। उसका असर उनके दिमाग पर पड़ता है। कई बार चाहकर भी अभिभावक उनके गुस्सैल स्वभाव को भांप नहीं पाते और आवेश में ऐसे कदम उठा लेते हैं। माता पिता यही कोशिश करें कि बच्चों के अधिक से अधिक समय तक करीब रहें और उन्हें समझाने की कोशिश करते रहें।