सहारनुपर के गंगोह में 36 घंटों में बुखार से गांव कोटडा और धलापड़ा के तीन लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा नगर और देहात में बड़ी संख्या में लोग मलेरिया, टाइफाइड और वायरल की चपेट में है। क्षेत्र में बुखार का प्रकोप बढ़ता देख नागरिकों में भय का माहौल है।
गांव कोटडा निवासी 50 वर्षीय रणजीत सिंह को चार दिनों से बुखार था। परिजनों ने पहले गांव में उसका उपचार कराया। हालत में सुधार ना होने पर परिजनों ने सोमवार को उसे सीएचसी में भर्ती कराया था।
वहां भी उसकी हालत बिगड़ने लगी तो चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। मंगलवार सुबह वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। गांव के ही 40 वर्षीय मुस्तकीम की भी रविवार रात गांव में ही बुखार की तीव्रता के कारण मौत हो गई थी।
इसके अलावा गांव धलापड़ा के 32 वर्षीय नसीम ने दो दिन पूर्व दिल्ली स्थित अस्पताल में दम तोड़ा। उसके भाई मुबारिक के अनुसार नसीम को 15 दिन से बुखार था। अनेक स्थानों पर दिखाने के बाद हालत में सुधार ना होने पर परिजन उसे दिल्ली ले गए थे।
उधर, गांव कोटडा निवासी रणजीत सिंह की पुत्रवधु और पोती रीना को भी बुखार से हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गांव निवासी अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के ब्लाक अध्यक्ष आसिफ चौधरी ने सीएचसी प्रभारी पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
बताया कि गांव की लगभग आधी आबादी बुखार की चपेट में है। उन्होंने सीएचसी प्रभारी से मिलकर स्थिति से अवगत कराते हुए गांव में कैंप लगाने की मांग की थी, परंतु कोई व्यवस्था नहीं की गई। इससे हालात अधिक बिगड़ गए है।
उधर डा. अनवर अंसारी ने बताया कि दो दिन पूर्व उन्हें गांव में बुखार फैलने की जानकारी मिली थी। स्टाफ की कमी के चलते शिविर नहीं लगाया जा सका। जल्द ही गांव में शिविर लगाकर जांच की जाएगी।