सहारनपुर में कभी जीवनदायिनी नदी मानी जाने वाली ढमोला नदी अफसरशाही की उदासनीता के चलते अपनी हालत पर आंसू बहा रही है। अफसरों के नदी तक पहुंचने से कुछ उम्मीद बंधी, लेकिन टालने की प्रक्रिया शुरू हुई तो फिर आस टूटने लगी।
मानसून सिर पर है, बारिश शुरू हो गई तो अभियान तो टल जाएगा, लेकिन सहारनपुर के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी। जीवनदायिनी रही ढमोला नदी आज अपना अस्तित्व बचाने के लिए अफसरों की ओर देख रही है।
लोगों ने आवाज उठाई तो फसर ढमोला नदी तक पहुंच गए, जिससे लोगों में उम्मीद बंधी कि अब ढमोला नदी का उद्धार संभव है। प्रशासन ने भी पूरा भोकाल खड़ा कर दिया कि अब किसी की सिफारिश और दबाव नहीं माना जाएगा, बहुत नोटिस भेज लिए, अब सिर्फ ध्वस्तीकरण होगा।
लेकिन दो दिन में ही अफसरों की आवाज ठंडी पड़ गई। अधिकारी अब केवल कागजी कार्रवाई में उलझ गए। नोटिस न भेजकर सीधे अतिक्रमण को ध्वस्त करने की हुंकार भरने वाले प्रशासनिक अधिकारियों पर न जाने किसका और कितना बड़ा दबाव पड़ा कि इस अभियान को टालने के लिए फिर से
नोटिस चस्पा करने का दिखावा शुरू कर दिया। मानसून सिर पर है और बारिश शुरू होने जा रही है। एक बार बरसात शुरू हो गई तो फिर बरसात का बहाना हो जाएगा और अभियान ठंडे बस्ते में चला जाएगा। ध्वस्तीकरण में हो रही देरी ने प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिससे लोगों की न सिर्फ ढमोला नदी के पुनर्जीवित होने की उम्मीद टूट गई है, बल्कि एक बार फिर बरसात के मौसम में 2013 की बाढ़ की परिकल्पना कर सिहर रहे हैं।
ढमोला नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बनाए गए नोडल अधिकारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व हरीश चंद्र का कहना है कि इस सप्ताह नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं और अगले सप्ताह में ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया जाएगा।