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होते रहे विवाद, बदलते रहे कचरा डंपिंग यार्ड

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- गांव सराय में ढमोला नदी किनारे बनाया गया था पूर्व में डंपिंग यार्ड। (फाइल फोटो) - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कचरा प्रबंधन के लिए डंपिंग यार्ड बनाने को लेकर विवाद होते रहे हैं। कभी सराय तो कभी शकलापुरी और पीकी गांव में डंपिंग यार्ड को लेकर विरोध हुआ। एक साल के भीतर ही चार जगह निगम बदल चुका है, अब बेहट रोड पर डंपिंग यार्ड और कचरा प्लांट के लिए जमीन खरीदी गई है, लेकिन वहां पर कचरा डालना अभी शुरू नहीं किया गया है।
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सहारनपुर महानगर में प्रतिदिन 320 टन तक कचरा निकलता है, जिसके निस्तारण के लिए नगर निगम की तरफ से ठोस योजना का अभाव रहा। कभी तो निगम ने कमेले के पास कचरा डलवाना शुरू किया तो वहां पर कचरे का पहाड़ जैसा बन गया। इसके बाद गांव पीकी के निकट कचरा डालना शुरू किया तो वहां विवाद हो गया। इसके बाद शकलापुरी गांव के निकट डंपिंग यार्ड बनाया तो वहां भी जमकर विरोध हुआ। करीब तीन महीने तक कुम्हारहेड़ा के निकट कचरा डाला गया, वहां भी ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया तो, फिर सराय गांव के निकट कचरा डालना शुरू किया। वहां एक ढमोला नदी के निकट कचरा डाला जा रहा था, जिस पर विरोध प्रदर्शन तक हुए। अब जनता रोड पर खुर्द गांव के पास कचरा डाला जा रहा है। साथ ही बेहट रोड पर महेशरी खुर्द के पास कचरा प्लांट के लिए जमीन खरीदी गई है।
महानगर से निकलने वाले कचरा प्रबंधन के लिए निगम की तैयारियां चल रही हैं। डंपिंग यार्ड के लिए जमीन ली गई है। कचरा प्लांट बनने पर कचरा उसी स्थान पर डाला जाएगा। - संजीव वालिया, महापौर, नगर निगम
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देवबंद में भी रहा है ऐसा विवाद
देवबंद। नगर पालिका देवबंद क्षेत्र में प्रतिदिन 50 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। नगरपालिका ने झबीरन के निकट तीन बीघा जमीन पर कूड़ाघर बनाया था। यहां पर बगैर चहारदीवारी के कचरा डालने पर ग्रामीणों ने विरोध किया था। बाद में नगर पालिका ने दीवार बनवा दी तो अब वहां पर कचरा डाला जा रहा है। नगरपालिका की करीब 35 गाडियां रोजाना नगर से लगभग 50 मीट्रिक टन कचरा एकत्र करके झबीरन स्थित कूडाघर में जाकर डालती हैं। सफाई एवं खाद्य निरीक्षक पोपिन कुमार ने बताया कि कचरा प्लांट पर छंटाई करके उससे कांच, पॉलीथिन, कपड़ा, गत्ता आदि को अलग किया जाता है, जिसके बाद ठेकेदार के माध्यम से कचरा बेचा जाता है। बीते महीने ही कचरा बिक्री से 73 हजार रुपये की आय पालिका को हुई।
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