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डेढ़ माह में ही दरकने लगी नवनिर्मित बाईपास की सड़क

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- नवनिर्मित बाईपास में गंगोह रोड पर बने पुल की दीवार के पैनल रोकने को लगाए गए बोल्ट। - फोटो : SAHARANPUR
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1184 करोड़ के निर्माण पर सवाल
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सहारनपुर। अंबाला-देहरादून हाईवे पर सहारनपुर बाईपास शुरू हुए डेढ़ महीना ही बीता पाया है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। बदहाली के आलम में सड़क में जहां तहां दरारें पड़ गई हैं तो, पुल की दीवार में लगे पैनल जगह छोड़ गए हैं। रैलिंग का निर्माण भी कई जगह अधूरा पड़ा है। कुछ संकेतक भी उखड़ गए हैं। पेश है बाईपास की लाइव रिपोर्ट...
सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ था वाहनों का संचालन
अंबाला-देहरादून नेशनल हाईवे सरसावा से गागलहेड़ी तक सहारनपुर बाईपास बनाया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने यह निर्माण कराया है। सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में बाईपास को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया था। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इसका शुभारंभ किया था।
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बोल्ट लगाकर रोके गए पैनल
बाईपास के तहत गंगोह रोड पर फ्लाईओवर बना है। पुल की दीवार पैनल से बनाई गई है। यहां पर एक दर्जन से ज्यादा पैनल अपनी जगह छोड़ चुके हैं, जिन्हें रोकने के लिए बोल्ट लगाए गए हैं। सवाल यह है कि क्या दीवार निर्माण के दौरान तकनीकी तौर पर तैयारियां पूरी नहीं थीं। पैनल हटने की वजह भराव की गई मिट्टी में पानी भरना भी बताया जाता है तो, मिट्टी भराव और उसमें पानी आने से रोकने के पहले से इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
सीमेंट की सड़क और जगह जगह दरारें
गंगोह रोड फ्लाईओवर से गागलहेडी की तरफ रेलवे लाइन के पुल तक ही 10 से ज्यादा जगह पर सड़क में दरारें पड़ चुकी हैं। सड़क सीमेंट निर्मित है। निर्माण एजेंसी ने दरारें भरने की जगह उस पर कई जगह तारकोल मिली बजरी को डाल दिया है, जिससे भरने के बजाय दरारें स्पष्ट दिखती हैं और बढ़ती जा रही हैं। रेलवे लाइन वाले पुल के कुछ पहले तो सड़क नीचे की ओर दब भी गई है।
संकेतक बोर्ड भी उखड़ने लगे
बाईपास पर अंबाला, यमुनानगर, देहरादून की दूरी दर्शाने वाले संकेतक लगाए गए हैं तो, इमरजेंसी हेल्पलाइन और अन्य सुविधाओं वाले संकेतक भी लगे हैं। गंगोह फ्लाईओवर से गागलहेडी की तरफ करीब दो किलोमीटर चलने पर इमरजेंसी हेल्पलाइन वाला संकेतक उखड़ चुका है। इसके अलावा कई जगह पर रैलिंग का निर्माण भी अधूरा छोड़ दिया गया है।
एक नजर में प्रोजेक्ट
निर्माण, परिचालन, हस्तांतरण (बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर बीओटी) पर आधारित गागलहेडी से यमुनानगर तक करीब 43 किलोमीटर लंबाई के मार्ग का निर्माण हुआ है, जिसको हाईवे 344 का नाम दिया गया है। निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था। करीब 1184 करोड़ रुपये लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 17 अंडरपास, तीन बड़े पुल, दो फ्लाईओवर बनाए गए हैं।
बीओटी के तहत इसका निर्माण हुआ है। अधूरे कार्य पूर्ण कराए जा रहे हैं, रैलिंग भी बनवाई जा रही है। नए स्थान पर मिट्टी भराव कर दीवार बनाने में कई बार दिक्कत आ जाती है, उसी कारण पुल की दीवार में बोल्ट मरम्मत कराई गई है। बीओटी के तहत 15 साल तक प्रोजेक्ट पर मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की ही है। जो कमियां हैं, उन्हें दूर कराया जा रहा है।
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- प्रदीप गोसाईं, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई

- नवनिर्मित सहारनपुर बाईपास की सड़क में पड़ी दरारें।- फोटो : SAHARANPUR

- नवनिर्मित सहारनपुर बाईपास की सड़क में पड़ी दरारें।- फोटो : SAHARANPUR

- नवनिर्मित सहारनपुर बाईपास की दरकी सड़क- फोटो : SAHARANPUR

- नवनिर्मित बाईपास पर उखड़ गया सड़क किनारे लगा संकेतक।- फोटो : SAHARANPUR

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