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मुआवजे पर अफसर और किसानों के बीच नहीं बनी बात

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नागल। मीरपुर रेलवे फाटक पर फ्लाई ओवर में आने वाली जमीन के मुआवजे को लेकर अधिकारी व किसानों की वार्ता बेनतीजा रही। किसान अपनी भूमि का मुआवजा सर्किल रेट से चार गुना अधिक दिए जाने की मांग कर रहे हैं जबकि प्रशासनिक अधिकारी उसपर सहमत नहीं हैं। इतना ही नहीं किसानों ने रेलवे दोहरीकरण के दौरान खत्म की गई चकरोड़ की एवज में दूसरी भूमि चकरोड़ देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती तब तक वह निर्माण कार्य नहीं होने देंगे।
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बुधवार को मीरपुर मोहनपुर के प्राथमिक विद्यालय में अपर जिलाधिकारी एफ की मध्यस्थता में अधिकारियों ने किसानों से वार्ता की। हालांकि एक घंटा तक चली बैठक में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। किसानों ने कहा कि उन्हें जमीन का सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए। वहीं कुछ किसानों ने अपनी जमीन पर दुकान व मकान बना होने पर आबादी के मुआवजे की मांग की। इस पर एडीएम एफ विनोद कुमार ने कहा कि वह किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए अधिकारियों को रिपोर्ट भेजेंगे। वही जिन किसानों की जमीन पर फसल, पेड़ या निर्माण हुआ है उसका संबंधित विभाग से मूल्यांकन करा कर उसका मुआवजा दिलवाया जाएगा। किसानों ने अधिकारियों से रेलवे दोहरीकरण के लिए चकरोड के अधिग्रहण को लेकर कहा कि रेलवे ने खेतों पर जाने के लिए चकरोड नहीं छोड़ा है। चकरोड़ की व्यवस्था कराई जाए। इस पर एडीएम ने संबंधित अधिकारियों से वार्ता करने की बात कही।
बैठक में भाकियू तोमर गुट के मंडल उपाध्यक्ष चौधरी बिरेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक रेलवे किसानों को चकरोड नहीं देती तब तक वह निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। इस दौरान एसडीएम सदर अनिल कुमार , एसडीएम देवबंद राकेश कुमार, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ताराचंद रवि, परियोजना प्रबंधक सेतु निगम सत्येंद्र सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
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