सहारनपुर, रामपुर मनिहारान। जिले के गांव घाटहेड़ा में देश का पहला गांधी आश्रम है। इसकी स्थापना वर्ष 1943 में हुई थी। स्वतंत्रता आंदोलन में भी यहां के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। अंग्रेजी शासन काल में बना यह गांधी आश्रम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की शरणस्थली था। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और कांग्रेस नेता कमलापति त्रिपाठी सरीखे दिग्गज भी यहां आते थे। मनानी रेलवे स्टेशन को फूंकने की रणनीति भी घटेहड़ा के गांधी आश्रम में ही बैठकर आजादी के मतवालों ने बनाई थी, जिसे बाद में अंजाम तक पहुंचाया गया था।
यहां के गांधी आश्रम में कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी था। जहां से प्रशिक्षण लेने के बाद देश भर के गांधी आश्रमों पर कर्मचारियों की तैनाती होती थी। ऐसे में एक वक्त ऐसा भी रहा जब घाटहेड़ा की पहचान पूरे देश में रही। गांव में स्थित गांधी आश्रम की इमारत आज भी इतिहास की साक्षी बनी है। गुर्जर बाहुल्य इस गांव की आबादी करीब छह हजार है।
- गांव से हुए जिले के सर्वाधिक 10 स्वतंत्रता सेनानी
ग्रामीण रविंद्र कुमार ने बताया कि उनके गांव में ब्लाॅक के सर्वाधिक दस स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं। इन सबके नाम खंड विकास कार्यालय रामपुर मनिहारान परिसर में लगे शिलालेख पर अंकित हैं। बुजुर्गों से सुना है कि आजादी के आंदोलन के वक्त प्रत्येक परिवार से कोई न कोई व्यक्ति सक्रिय रूप से भाग लेता था।
- गांव की है देश भर में पहचान
ग्राम प्रधान रूबी का कहना है कि गांव की पहचान देश भर में हैं। आजादी में गांव के बुजर्गों की अहम भूमिका रही है। यहां का गांधी आश्रम आज भी नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जागृत करता है। लोग इसे दूर-दूर से देखने आते हैं।
- गांधी आश्रम को स्मारक घोषित करे सरकार
ग्रामीण राजकुमार का कहना है कि अंग्रेजी शासनकाल का गांधी आश्रम होने के बावजूद सरकारी स्तर पर यह उपेक्षित है। सरकार को चाहिए कि वह इसे स्मारक घोषित कर इसकी देखरेख का जिम्मा ले ताकि आने वाली पीढि़यों के लिए यह सुरक्षित रह सके।
- रात भर जागकर बनाई जाती थी रणनीति
संदीप चौधरी का कहना है उन्होंने अपने बुजुर्गों से सुना है कि अंग्रेजी शासन से मुक्त होने के लिए गांव में रात-रात भर रणनीति बनाई जाती थी। इसमें सभी लोग उत्साह से भागेदारी करते थे। अंग्रेजों की सख्ती के बावजूद ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं होता था।