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मरीजों की मौत पर तीमारदारों में गम और गुस्सा

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डकल कॉलेज में सोमवार को भी कई मरीजों की मौत हुई। कोरोना से मरने वाले हर मरीज के तीमारदार विलाप के साथ ही व्यवस्था को कोसते नजर आए। कोई कह रहा था कि उपचार सही नहीं मिला तो कोई गुमराह करने का आरोप लगा रहा था।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के कोरोना संक्रमितों की मौत लगातार सामने आ रही है। सोमवार को गांव नोसरहेड़ी की रहने वाली रमेश की मौत हो गई। उनकी दो बेटियां अस्पताल के बाहर गार्डन की रेलिंग पर बैठकर फूट फूटकर रो रही थीं। उनका कहना था कि रमेश को शनिवार को भर्ती कराया गया था। रविवार रात तक यही बताया जाता रहा कि मरीज ठीक है, लेकिन सुबह कह दिया गया कि मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी क्या कमी हुई तो इतने कम समय में मौत हो गई, कोई जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सुबह मौत होने के बावजूद दोपहर 12 बजे तक शव भी अस्पताल से बाहर नहीं निकाला गया है।
इसी तरह लक्सर खानपुर निवासी धर्मेंद्र की मौत भी राजकीय मे़िडकल कॉलेज में हुई, उनके परिवार के लोग भी बिलखते नजर आए। उनका भी कहना था कि रात तक तो सबकुछ ठीक था। उधर, गांव घाटहेड़ा निवासी नोमान की भी मौत होने पर उनके परिवार से कंवर अली ने बताया कि रात में नोमान की हालत सामान्य बताई गई थी, लेकिन सुबह मिलने नहीं दिया गया। करीब साढ़े 11 बजे कहा गया कि नोमान की मौत हो गई है।
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