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Saharanpur News: नमक और अदरक से रोजा इफ्तार का कोई शरई वजूद नहीं

Sat, 23 Mar 2024 04:40 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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देवबंद। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलना कारी इस्हाक गोरा ने शुक्रवार को हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि इस्लाम में जकात की बहुत बड़ी अहमियत है। जकात इस्लाम का अहम रुकन (भाग) है। नमाज रोजे की तरह जकात देना भी भी फर्ज इबादत है।
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सवाल: हरियाणा के मौई गांव से जब्बार ने मालूम किया कि हमारे परिवार में काफी समय से नमक और अदरक से रोजा इफ्तार किया जाता है और यह लोग इसको सुन्नत समझते हैं। क्या ये दुरुस्त है?
जवाब: यह बात बिल्कुल गलत है, शरीयत में इसका कोई वजूद नहीं, जो लोग नमक या अदरक से रोजा इफ्तार को सुन्नत या मुस्तहब (प्रिय चीज) समझते हैं यह उनकी कम इल्मी (कम पढ़ा लिखा) की अलामत (पहचान) है।
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सवाल: मुजफ्फरनगर निवासी नौशाद ने मालूम किया कि उनके दांतों में कुछ फंसा हुआ महसूस हो रहा था, जिसे वो निकाल रहे थे कि अचानक दांतों से खून निकलने लगा। अब ऐसी सूरत में उनका रोजा रहा या नहीं?
जवाब: अगर किसी व्यक्ति के रोजे की हालत में दांत से खून निकल आए, लेकिन हलक में न जाए तो रोजे पर कोई फर्क नहीं पडे़गा।
सवाल: सहारनपुर के नखासा बाजार निवासी नदीम ने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति किसी मस्जिद के इमाम की मुखालिफत करता है और उनके पीछे नमाज भी पढ़ता है और मिलते हुए मुस्कुराहट सजा लेता है। ऐसे व्यक्ति के बारे में शरीयत का क्या हुक्म है?
जवाब: शरीयत में ऐसे व्यक्ति को मुनाफिक (दोहरे चरित्र वाले) का दर्जा दिया गया है, अगर कोई शख्स इमाम के पीछे बुराई और उसी के पीछे नमाज पढ़ता है तो उसको अपनी नमाजों की फिक्र करते हुए दारुल इफ्ता से तफसीली फतवा लेना चाहिए।
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