सहारनपुर जिले में डेढ़ दशक से तीन स्कूल फर्जी कागजों के आधार पर ही संचालित हो रहे हैं। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग की जांच में खुलासा होने के बाद अफसरों में हड़कंप मचा है।
तीनों स्कूल मान्यता के फर्जी पत्र तैयार संचालित किए जा रहे थे। इतना ही नहीं मान्यता के तीनों पत्रों पर बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर और पत्रांक संख्या भी फर्जी पायी गई। विभाग की ओर से तीनों स्कूलों के विरुद्घ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बता दें कि विकास खंड पुंवारका के माटकी झरौली में शिवम पब्लिक स्कूल 1998 से संचालित है। गांव के नए प्रधान ने बेसिक शिक्षा विभाग में शिकायती पत्र देकर स्कूल को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की थी।
विभाग ने जांच की तो विभाग में उक्त स्कूल की मान्यता का कोई अभिलेख दर्ज नहीं पाया गया। मान्यता के प्रमाण पत्र की जांच की गई तो वह फर्जी पाया गया। उक्त स्कूल के संचालक की पत्नी जूनियर हाईस्कूल नाजिरपुरा में प्रधानाध्यापिका बताई जा रही है।
दूसरा मामला हिम्मतनगर स्थित लिटिल बर्ड पब्लिक स्कूल और लिटिल बर्ड पब्लिक जूनियर हाईस्कूल का है। इन दोनों स्कूलों में कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ तक की मान्यता के अलग अलग कागजात है।
सत्ताधारी पार्टी के कुछ नेताओं ने मंडलायुक्त से शिकायत कर स्कूल के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की थी। शिक्षा विभाग की ओर से जांच बैठाई गई तो उक्त दोनों प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल की मान्यता के दस्तावेज फर्जी पाये गए।
विभाग को उक्त तीनों स्कूलों की मान्यता पत्रावलियां कार्यालय में खोजी गई, लेकिन कोई पत्रावली नहीं मिली। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तीनों स्कूलों के संचालक मान्यता के फर्जी कागज तैयार कर स्कूल संचालित कर रहे थे। तीनों के विरुद्घ कार्रवाई की जा रही है।
q जनपद में ऐसे दर्जनों स्कूल संचालित ः तीन स्कूलों के फर्जी कागज सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग के अफसरों की निगाह दूसरे स्कूलों पर टिकी है। सूत्रों की माने तो जिले भर में दर्जनों ऐसे स्कूल संचालित हैं, जिनकी मान्यता तक नहीं है।
बावजूद इसके सांठगांठ के आधार पर इन स्कूलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि इस खुलासे के बाद ऐसे संचालकों में हड़कंप है। बीएसए के हस्ताक्षर और पत्रांक संख्या भी फर्जी ः फर्जी कागजातों के आधार पर चल रहे तीनों स्कूलों के पास कागजात थे।
जब इन कागजों की जांच की गई तो इसमें पत्रांक संख्या से लेकर बीएसए के हस्ताक्षर तक फर्जी पाया गया। हालांकि इस मामले में बीएसए ने अभी तीनों स्कूलों को नोटिस दिया है।