सहारनपुर जिले के कॉलेजों द्वारा छात्र-छात्राओं का वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति हड़प करने का खुलासा होने के बाद विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों में भी खलबली मची हुई है।
कॉलेजों ने तो कार्रवाई पर स्टे ले लिया, लेकिन अधिकारियों को न सिर्फ धमकाया जा रहा है, बल्कि दबाव भी बनाया जा रहा है। ऐसे में कहीं यह घोटाला मुजफ्फरनगर की तरह खून-खराबा न करा दे।
जिले के 32 कालेजों में शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति में 50 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला पकड़ा गया है। जिसमें यह घोटाला 2012 से लेकर 2015 तक का बताया जा रहा है। इसमें लखनऊ से ही टीम भेजकर जांच कराई गई और घोटाले के आरोपों को सही मानते हुए रिपोर्ट शासन को दी।
विभागीय सचिव ने 32 कॉलेजों के साथ तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी की संलिप्तता मानते हुए एफआईआर कराए जाने के आदेश दिए।
जैसे ही विभाग की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई, पूरे जिले में खलबली मच गई।
न सिर्फ कॉलेज संचालकों में हड़कंप मच गया, बल्कि इतने बड़े गोलमाल में कई अधिकारी फंसने की आशंका को लेकर प्रशासन में भी खलबली मची हुई है।
जांच रिपोर्ट में गोलमाल के सामने आने के बाद से ही कुछ कॉलेज संचालकों द्वारा धमकियां दिए जाने, दबाव बनाए जाने का प्रयास शुरू कर दिया गया।
एफआईआर होते ही कॉलेज सीधे कोर्ट पहुंच गए और सभी आरोपी कॉलेज संचालकों ने कार्रवाई से बचने के लिए स्टे ले लिया।
सभी कॉलेज संचालक प्रयास कर रहे हैं कि उनके कॉलेज का नाम घोटाले की सूची से किसी भी प्रकार निकाल दिया जाए। इसके लिए साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपना रहे हैं। इससे यहां मुजफ्फरनगर के जैसे खून-खराबे की आशंका जताई जा रही है।
उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार हुई एफआईआर जिला समाज कल्याण अधिकारी मोहम्मद मुश्ताक अहमद का कहना है कि शासन से ही जांच की टीम आई और जांच टीम ने शासन को ही रिपोर्ट सौंपी। वहीं से कॉलेजों में एफआईआर कराने की सूची दी गई। उसी के अनुसार कार्रवाई की गई है।