सहारनपुर। अक्सर सड़क हादसों में लोगों की जान इसलिए चली जाती है, क्योंकि उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता। सरकार ने ऐसी समस्या से निपटने के लिए न सिर्फ योजना बनाई बल्कि इंसानियत की कीमत भी अच्छी बताई, लेकिन लोगों की जान बचाने की इस योजना ने खुद ही दम तोड़ दिया। योजना बदलने, राशि पांच गुना होने के बाद भी जिले में कोई राहवीर नहीं मिला है।
गोल्डन ऑवर में घायल हुए व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने के लिए सरकार ने बीते साल राहवीर योजना शुरू की थी। पहले इस योजना का नाम नेक इंसान (गुड सेमेरिटन) था, जिसमें बदलाव करते हुए राहवीर योजना में संशोधित किया। पहले गोल्डन ऑवर में घायल को अस्पताल पहुंचाने पर पांच हजार रुपये की राशि थी, जो राहवीर योजना में बढ़कर 25 हजार रुपये तक हो गई, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी अब तक राहवीर नहीं मिला है।
पूर्व में राहवीर के लिए एक आवेदन आया था, जो जांच में निरस्त हो गया। मुख्य कारण कहीं शर्तों का रोड़ा तो कोई पुलिस की जांच में नहीं पड़ना चाहता। इस योजना का उद्देश्य लोगों को कानूनी झंझटों के डर से मुक्त करना और पीड़ितों की मदद के लिए प्रोत्साहित करना है। जिला स्तर पर एसपी, सीएमओ और एआरटीओ की कमेटी राहवीर का चयन करती है।
तीन महीने में हुए 133 हादसे, 76 की गई जान
संभागीय परिवहन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में जनवरी से मार्च के बीच 133 सड़क हादसे हुए। इनमें 76 लोगों की जान गई, जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थी। इनके अलावा 116 लोग घायल हुए। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ा है।
राहवीर योजना के लिए आवेदन आया है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। पूर्व में आया आवेदन कुछ कमियों की वजह से निरस्त हो गया था। योजना के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
- एमपी सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन